गले का कैंसर के लक्षण, इलाज और उपाय

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कैंसर एक बेहद ही खतरनाक और जटिल रोग है। किसी भी पद्धति में इस रोग का समुचित उपचार संभव नही है। लेकिन योग और प्राणायाम से हम इसका उपचार कर सकते हैं। मानव के शरीर में लाखों कोशिकाएं हैं जो प्रतिदिन लाखों कि तादात में बनती और नष्ट हो जाती है। जब इन कोशिकाओं की वृद्धि करने में शरीर का नियंत्रण हट जाता है और वे असमान्य रूप से बढ़ने लगती हैं तब इनकी वृद्धि’ से कैंसर कि समस्या उत्पन्न होती है। यही प्रक्रिया गले का कैंसर में भी लागू होती है, हालांकि अगर गले का कैंसर पता चल जाए तो इसका इलाज आसान है।चलिए इसके बारे में पूरी जानकारी अर्जित करते हैं।

गले का कैंसर , gale ka cancer

गले में दो प्रकार के कैंसर होते हैं:

  1. स्वर यन्त्र का कैंसर या लंशिंग्स का कैंसर- इस कैंसर के रोगी बहुत कम होते हैं। स्त्रियों कि अपेक्षा पुरुषों में यह कैंसर ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। इस तरह के कैंसर में ट्यूमर या रसौली स्वशन नलिका में स्तिथि स्वर यन्त्र में होती है। इससे आवाज में बदलाव आ जाता है। 
  2. ग्रास नलिका का कैंसर- यह गले की grass नलिका या ग्रसनी में कैंसर होता है। इसके अतिरिक्त टांसिल में भी कैंसर होता है। भारत में आंकड़ों के अनुसार गले का कैंसर 12 प्रतिसत लोगों को होता है। गले के कैंसर का शीघ्र पता लगने पर उसका अच्छी तरह से इलाज हो सकता है। शुरुआती दौर में यह कैंसर असाध्य नही होता है पर समय बीत जाने पर यह जान भी ले सकता है।

गले का कैंसर का लक्षण:

  1. स्वर यन्त्र के कैंसर में आवाज भारी हो जाती है।
  2. गले कि लसिका ग्रन्थ में सूजन आ जाता है।
  3. साँस लेने में तकलीफ होती है।
  4. किसी चीज को खाने में दर्द होता है।
  5. खाँसी के साथ साथ बलगम भी पकड़ लेता है।
  6. गले और कान में असहनीय दर्द होता है।
  7. गले कि ग्रास नलिका के कैंसर में कोई चीज निगलने में तकलीफ होती है। इसके साथ ही स्वर यन्त्र में बदलाव के कारण आवाज भारी हो जाती है और बदल भी जाती है।
  8. रोगी को साँस लेते वक़्त दर्द होता है और साँस अच्छी तरह से नही ले पाता है।
  9. गले में सूजन आ जाता है।

गले का कैंसर के होने के कारण

  1. अधिक तम्बाकू खाना और धूम्रपान करना।
  2. अधिक शराब पीना।
  3. कोलतार, विनाइल, क्लोराइड, बेंजीन, लेदियम, आर्सेनिक, आदि रासायनिक पदार्थ भी कैंसर उत्पन्न करते हैं। कारखानों में इन पदार्थों के संपर्कमें प्रतिदिन आने से वहां के कर्मचारियों में कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।
  4. ऐसे खाद्य पदार्थ जो गले में जलन पैदा करते हैं कैंसर को अंजाम देते हैं।
  5. डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ और कृत्रिम रंग एवं रसायनों के सेवन से भी कैंसर होने की सभावना बढ़ जाती है।
  6. शीतल पेय जैसे पेप्सी, कोक, आदि का अधिक सेवन करने से भी गले का कैंसर होता है।
  7. जेनेटिक वजह भी कैंसर का एक कारण हो सकती है। यह देखा गया है कि अगर किसी माँ को किसी प्रकार का कैंसर है तो बच्चों को भी होने कि संभावना रहती है।

रोग का निदान:

आधुनिक युग में कैंसर जैसे रोग का सफाया शुरआती दौर में ही संभव है। कैंसर कि पहचान जितनी जल्दी होगी उतना ही सफल इलाज होगा और योग से भी उतना ही अधिक लाभ होगा।

गले के कैंसर से बचाव:

  1. गले के कैंसर से बचाव के लिए जरुरी है कि खान-पान कि आदतों में सुधार लाया जाये।
  2. स्वस्थ्य के लिए हानिकारक मादक चीजों का सेवन छोड़कर इस रोग से बचा जा सकता है।
  3. तम्बाकू का सेवन किसी भी प्रकार से छोड़ना अच्छा रहता है। इसके अतिरिक्त पान मसाला कच्चा सुपाड़ी आदि का सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए वरना कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
  4. तम्बांकू से युक्त मंजन का इस्तेमाल कदापि न करें।
  5. शराब का नशा छोड़ दें वरना गले का कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
  6. ज्यादा तले भुने, मिर्च मसाले वाले आहार से परहेज करें। ऐसे आहार कभी-कभी ही खाएंं।
  7. अधिक चर्बीयुक्त पदार्थ भी गले के कैंसर को बढ़ा सकता है इसलिए इनसे परहेज करें।
  8. आधुनिक वैज्ञानिकों ने अब यह सिद्ध कर दिया है कि मांसाहारियों कि अपेक्षा शाकाहारियों को गले के कैंसर कि समस्या कम होती है।
  9. रसायनयुक्त खाद्य पदार्थों से भी दूरी बनाए रखना जरुरी है।
  10. मोटापे पर नियंत्रण रखना भी कैंसर से बचाव के लिए जरुरी है क्यूंकि यह देखा गया है कि मोटे लोगों को कैंसर होने कि संभावना अधिक रहती है।
  11. अपने भोजन में नाना प्रकार कि विटामिन्स से भरपूर साग सब्जियां फल आदि शामिल कर गले के कैंसर से अपना बचाव किया जा सकता है।
  12. भोजन में विटामिन c और विटामिन a से भरपूर खाद्य पदार्थों को लेने से कैंसर का खतरा टल जाता है। गाजर, आंवला, अमरुद, नींबू, संतरा, हरी सब्जियां, सलाद आदि को पर्याप्त मात्रा में शामिल कर विटामिन c और विटामिन a कि आवश्यकता कि पूर्ती कि जा सकती है।
  13. दुसरे नंबर पर विटामिन c का स्त्रोत संतरा, अमरुद, नींबू आदि खाती मीठे स्वाद वाले फल होते हैं। गाजर विटामिन a का सबसे अच्छा स्त्रोत है। अगर आप कच्चा गाजर नही खा सकते यतो उसमे टमाटर के साथ जूस बनाकर पीजिये। गाजर और टमाटर का जूस गले का कैंसर से लड़ने में काफी अच्छा होता है क्यूंकि इसमें विटामिन a और c दोनों मिक्स होते हैं।
  14. विटामिन c और विटामिन a तथा भोजन में रेशों कि मात्रा कई तरह के कैंसर से बचाती है।
  15. रेशेदार खाद्य पदार्थों को खाने से आंत का कैंसर नही होता है और मल का आँतों में जमाव भी नही होता है।
  16. उम्र के चालीस वर्ष के बाद, दो वर्ष के अंतराल में गले के कैंसर के लिए शारीरिक परिक्षण करवाना भी कैंसर कि रोकथाम में सहायक साबित होता है।
  17. अगर कैंसर का पता लग जाये तो योग और प्राणायाम जरुर करें इससे गले के कैंसर को दूर करने में मदद मिलेगी।
  18. अगर अंग्रेजी दवाइयों से कोई फायदा नही मिल रहा है तो आयुर्वेद का सहारा लेना न भूलें।

ऊपर बताए गए सभी उपाय सही और लाभदायक हैं इन्हें अपनाकार केवल गले के कैंसर से नही बल्कि शरीर के सभी कैंसर से छुटकारा पाया जा सकता है। ऊपर बताये गए तरीकों का ख्याल जरुर रखें और किसी भी ऐसी चीज का सेवन ना करें जिससे आपकी सेहत बिगड़ जाये।

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Shiv Kumar is one of the best writer of lyfcure. All articles are cross-checked by Shiv before being public and if any mistakes happen, He works to correct it and then the health related articles are published. The most special thing is that it is an experienced writer who has done M.Sc from zoology. He has received Naturopathy education from Banda.

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