डेंगू के लक्षण

डेंगू के लक्षण, लक्षण में ही छुपा है इलाज – dengue ke lakshan me chupa hai ilaj

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डेंगू बुखार एक ऐसी बीमारी है जो वायरस के कारण होती है जो मच्छरों द्वारा लोगों तक आ जाती है। डेंगू बुखार  बुखार, त्वचा की धड़कन और दर्द (सिरदर्द और अक्सर  मांसपेशियों में दर्द) का कारण बनता है। इस बीमारी को “ब्रेकबोन बुखार” या “डेन्डी बुखार” भी कहा जाता है। डेंगू के लक्षण, लक्षण में ही छुपा है इलाज ।। dengue ke lakshan me hi chupa hai ilaj

dengue के symptoms का पहला stage

मच्छरके काटने के बाद लक्षणों को दिखाने के लिए समय लगता है, लक्षण तीन और पंद्रह दिनों के बीच नजर आ सकता है। लक्षण कई भागों में नजर आ  सकते हैं । dengue सिरदर्द, ठंड, बुखार, आंखों में दर्द, भूख की कमी और पीठ दर्द जैसे अधिक सौहार्दपूर्ण लक्षणों से शुरू होता हैं।

जोड़ों में दर्द डेंगू के होने के बाद पहले घंटों में  ही होता है। रोगी 104 डिग्री फ़ारेनहाइट तक का बुखार अनुभव कर सकता है, हाइपोटेंशन के साथ  दिल की दर कम हो जाती है, जो कम रक्तचाप के रूप में नजर आती है। इनके अलावा, आंखों में लालिमी छा सकती है, चेहरे पर गुलाबी चकत्ते का विकास हो सकता है जो अचानक से गायब हो सकता है और शरीर के भाग लिम्फ नोड्स और ग्रोइन में सूजन हो सकताहै।

ऊपर दिए गए लक्षण डेंगू के पहले चरण ( first stage) में दिखाई देते हैं, जो शुरू होने के बाद चार दिनों तक चलते हैं।

डेंगू के लक्षण का दूसरा stage

दूसरा चरण शरीर के तापमान (temprature) में कमी और पसीने में एक बूंद के साथ शुरू होते हैं। लेकिन अचानक, आप अनुभव कर सकते हैं कि आपके शरीर का तापमान सामान्य हो गया है और आप  बेहतर महसूस करेंगे, लेकिन यह एक दिन से अधिक समय तक नहीं टिकेगा और आपको डेंगू के लक्षणों के दूसरे चरण में(temprature कम हो जाना) ले जाएगा।

डेंगू के लक्षण का तीसरा स्टेज

तीसरे चरण में  शरीर के तापमान में तेजी से वृद्धि देखी जा सकती है, जिसमें आपके शरीर पर चकत्ते (Rashes) का विकास होता है लेकिन आपका चेहरा इन चक्क्तों से भरा होता है।डेंगू के लक्षण

अन्य संक्षिप्त लक्षण: 

इस रोग के मुख्य लक्षणों को जान लेना जरूरी है क्यूंकि जब तक अज्ञानता फैली रहेगी तब तक अन्धेरा छाया रहेगा भय और घबराहट बनी रहेगी परन्तु जैसे ही जानकारी की किरणों चमकेंगी अन्धकार मिट जाएगा आतंक व घबराहट अपने आप समाप्त हो जाएंगी।

लक्षण:

इस रोग में अचानक तेज बुखार का आक्रमण होता है और 2-3 घंटो के भीतर ही गले, आँखों, जोड़ो, पीठ में तथा मांशपेशियों में बहुत अधिक पीड़ा आरम्भ हो जाती है। 2-3 दिनों तक तेज बुखार चढ़ा रहता है। फिर 4 दिन बाद बुखार सामान्य तापमान पर आ जाता है।

रोगी ऐसा समझ लेते हैं कि चलो राहत मिली। परन्तु 24 घंटो के भीतर ही अचानक फिर से तेज बुखार का आक्रमण होता है- 106 डिग्री तक शरीर का तापमान चल जाता है। शरीर पर लाल-लाल धब्बे आ जाते हैं। जोड़ों पर खसरा के दानों के सामान महीन दाने निकल आते हैं।

यदि यह रोग बढ़ जाए तो नाक से, मसूड़ों से, उन दानों से जो शरीर से निकलते हैं- तथा इंजेक्शन की सुइयों के छेदों से या किसी चोट से रक्त बहना आरम्भ हो जाता है। यह रक्त फिर रुकता नहीं है। हमेशा बहता रहता है और रोगी अत्यंत दुर्बल होकर निढाल हो जाता है।डेंगू के लक्षण

नोट- डॉक्टरों का कहना है कि वायरस से संक्रमित आधे से ज्यादा लोग लक्षण  से फ्री रहते हैं, यानी, की उनमे dengue के कोई भी लक्षण नजर नहीं आते हैं।

यदि आप ऊपर बताए गए लक्षण पर भी डेंगू पर संदेह कर रहे हैं, तो आप नीचे दिए गए संकेतों की तलाश में हो सकते हैं, हालांकि ये दिख सकते हैं या नहीं भी दिख सकते हैं। ‘डेंगू के लक्षण, लक्षण में ही छुपा है इलाज ।। dengue ke lakshan me hi chupa hai ilaj’

  • अचानक से बुखार आ जाना– अगर आप इस बुखार से पीड़ित हैं तो इसके वायरस इतने कारगर होते हैं जो आपके शरीर के temprature को एक-साथ अचानक से बढ़ा सकते हैं। इसका आपके शरीर के इम्युनिटी पर गहरा असर होता है और आपके डेंगू के लक्षण में अचानक से तेजी से बुखार आ जाना और यह बुखार २ से 7 दिनों तक चलना शामिल हो जाता है।
  • आपकी आँखों में तेज दर्द-  आपके आँखों के पीछे और आँखों को इधर-उधर घुमाने में तेज दर्द होता है।
  • आंतरिक सर दर्द – dengue होने पर आपके खोपड़ी में आंतरिक वेदना होने लगती है। इससे आपके सर में हंथोड़े से वार हों महसूस होता है।
  • दिमाग का तितिर-बितिर होना- डेंगू के दौरान आपका दिमाग सही ढंग से कार्य नहीं करता है और आपके कंसंट्रेशन पॉवर पर असर पड़ता है जिसकी वजह से आप एक जगह अपने दिमाग को नहीं लगा पाते हैं और आप एक पागल के हरकत को महसूस करते हैं।
  • उल्टियाँ – इस समस्या से पीड़ित रोगी उल्टियों को झेलता है।
  • बीमार और थका हुआ महसूस करना-  कभी-कभार लक्षण प्रत्यक्ष रूप से नजर नहीं आते हैं और आप थका हुआ महसूस करते हैं।
  • आपके बोन जोड़ों में दर्द – आपके जोड़ों और हड्डियों के ऊपर एक खौफनाक दर्द का जन्म होता है जिसे हम बोन फीवर कह सकते हैं।
  • भूंख में कमी- dengue के संक्रमण से पीड़ित रोगी के आहार मी काफी उतार आ जाता है।
  • खट्टी डकारें – रोगी को खट्टी डकारों का भी अनुभव हो सकता है। इसके साथ गले पर मेटलिक टेस्ट का अनुभव होता है।

डेंगू का इलाज:-

  • ठंडे कपडे की पट्टी को माथे पर रखकर पैरों हांथों पर ठंडे पानी या व्बर्फ़ के पानी का स्पंज करते रहने से बुखार आए नहीं बढेगा। छत का पंखा, टेबल, फैन, आदि से कमरा ठंडा करिए।
  • रोज जितना अधिक ठंडा पानी ठंडे पदार्थ पीता रहेगा उतना ही अधिक लाभ मिलेगा।
  • कुछ इसी दावा भी रोगी को देनी चाहिए जिससे रोगी नींद लेता रहे।
  • कुछ ऐसी भी यूनानी दवाए हैं जिनके सेवन से चैन मिलता ही दिल की घबराहट, खून की गर्मी ठंडी होती हैं।
  • यदि रोगी के देख-रेख में 24 घंटों कोई लापरवाही न करी जाए तो 2-3 सप्ताह में रोगी ठीक हो जाएगा। उसके पश्चात धीरे-धीरे उचित भोजन खाते-खाते शरीर में बल पाकर स्वस्थ हो जाएगा।
  • यूनानी हर्बल टॉनिक इतने लाभकारी हैं जो बीमारी के बाद की कमजोरी को शीघ्र ही दूर कर देते हैं।
  • बुखार को किसी भी अवस्था में 103डिग्री से ऊपर जाने से रोकना चाहिए। इसके लिए हर उपचार को अपनाना चाहिए। यूनानी दवाओं से बुखार को काबू में रखा जा सकता है। क्योंकि यह शरीर में ठंडक पहुंचकर तापमान को गिराएगी, पीने के लिए यूनानी दवाओं के शरबत व अर्क दी जाते है, कुछ मुरब्बे व पत्तों का रस भी बुखार को आगे नहीं बढ़ने देगा।

डेंगू से बचाव कैसे करे?

  • मच्छरदानी के भीतर सोयें।
  • घर में नेम की पत्तियों व मुर को जलाकर धुआ करें।
  • जमे रुके पानी में मिटटी का तेल की बूंदे डालें।
  • पानी को उबाल कर छान कर ही पियें ।
  • मच्छर भगाने/मारने वाली चीजों से लाभ उठाएं।
  • घुटनों तक की सूती जुराब पहने।
  • पानी में फिटकरी डालकर शुद्ध करें।

dengue कैसे होता है?

आफ्रीका महाद्वीप में अत्यधिक गर्मी पड़ती है परन्तु वहीं पर सबसे बड़े घने जंगल, रेगिस्तान, व् दलदल, आदि भी हैं इसी कारण वहां पर सबसे अधिक मच्छरों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इनमे ही एक मच्छर का नाम AEDES AEGYPTI है। यह मच्छर जब किसी स्वस्थ मनुष्य का लहू चूसता है तब उस समय अपने डंक में छुपे ऐसे रोगाडुओं को मानव रक्त में छोड़ देता है जो डेंगू नाम की बीमारी फैलाते हैं।

यह AEDES मच्छर विश्व के ट्रॉपिकल देशों में विशेषकर गाँव देहातों तथा बड़े शहरों के बाहर गंदे इलाकों में पैदा होता है।

इस मच्छर के काटने के बाद 5-6 दिनों में असंख्य रोगाणु पैदा हो जाते हैं। इस अवस्था में रोगी को अचानक तेज बुखार चढ़ जाता है। यही पप्रारंभिक अवस्था DENGUE FEVER कहलाती है।

यह रोग महामारी में कब बदलता है?

AEDES मच्छरों के द्वारा काटे गए मनुष्यों  के शरीर में, यह रोफ पलता है। उस समय जो साधारण मच्छर भी मनुष्य को काटता है वह भी अपने साथ dengue के रोगी का रक्त ले जाता है। दूसरे स्वस्थ मनुष्य को काटने पर उसको भी रोगी बना देता हैइस प्रकार 15-20 दिनों के भीतर यह रोग महामारी के सामान फैलकर समाज में आतंक व् घबराहट फैला देता है।डेंगू के लक्षण

इस रोग से ग्रस्त प्रारम्भिक अवस्था वाले रोगी जिनको अभी तक बुखार का लक्षण नहीं हुआ है- जब वे रोगी यात्रा करके दुसरे देशों में जाते हैं तब भी यह रोग महामारी के सामान फ़ैल जाता है।

लाखों करोड़ों मच्छरों के बीच यह पता लगाना असंभव है की कौन सा मच्छर डेंगू बुखार के कीटाणु ला रहा है। और विशेषकर महामारी ग्रस्त क्षेत्र में तो 50 प्रतिशत से भी अधिक मच्छर डेंगू के कीटाणु का संवाहक होता है। इसी कारण रोगियों की संख्या बढ़ती जाती है। तब घबराहट भी बढ़ती है और आतंक फ़ैल जाता है।

डेंगू के लक्षण का ख़ास मेडिकल वजूद

मानव शरीर के रक्त का सम्मिश्रण कुछ इस प्रकार है की उसमे सफ़ेद कीटाणु, लाल कीटाणु तथा सूक्ष्म आकार के पत्रक (platelates) होते हैं\ यह प्लेटलेट्स शरीर के रक्त में रक्त को शीघ्र जमाने का गुण रखते हैं। इस गुण के कारण COAGULATION  होता है तथा शरीर के भीतर-बाहर कहीं भी चोंट लगने पर रक्त बहाना बंद हो जता है। इस गुण को मेडिकल भाषा में LYMPHEU PLASTICITY कहा जाता है। “डेंगू के लक्षण, लक्षण में ही छुपा है इलाज ।। dengue ke lakshan me hi chupa hai ilaj”

सामान्य अवस्था में इन प्लेटलेट्स के संख्या 1500-200 X10 9\L होती है। यह प्लेटलेट्स प्रतिदन लाखों संख्या में मृतक होते हैं तथा नए बनते रहते हैं। डेंगू रोग में इन प्लेटलेट्स की क्षति होती रहती है तथा नए बनाने की गति अति धीमी पड़ जाती है और भयानक स्थिति आ जाती है। और इसी वजह से कट लग जाने पर  खून का बहाव नहीं रुकता है।

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