अनुलोम विलोम, Anulom-vilom-yoga pranayam

नाड़ीशोधन (अनुलोम विलोम ) प्राणायाम कैसे करते है ? और इसके फायदे

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अनुलोम विलोम प्राणायाम को अगर सही तरीके से किया जाए तो यह बहुत फायदेमंद होता है जो हमें कई तरह के लाभ देता है तो चलिए इसके करने के तरीके और फायदे सहित सावधानी के बारे में जानते हैं।

अनुलोम विलोम करने का तरीका

  1. किसी खुली व स्वच्छ वातावरण वाली जगह पर बैठने के लिए जमीन पर आसन लगाये।
  2. अब आसन पर पलथी मारकर टाइट बैठ जाये यह मुद्रा उचित होती है।
  3. अगर पैरो में दर्द हो तो आप पैर फैला कर भी बैठ सकते है।
  4. ध्यान रहे! की आपके कमर के ऊपर का भाग खम्भे की तरह सीधा होना चाहिए।
  5. अब आखे बंद कर के श्वास प्रणाली पर ध्यान लगाये और दाहिने हाथ के अंगूठे से नाक के दाये छिद्र को बंद करे और बायीं छिद्र से धीरे धीरे साँस ले।
  6. छमतानुसार साँस लेने के बाद बायीं छिद्र को भी अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियो से बंद कर ले।
  7. दोनों छिद्रो को बंद कर साँस को कुछ समय अपने छमतानुसार रोके।
  8. फिर साँस रोकने के बाद साँस को  दाहिने छिद्र से धीरे धीरे निकाले।
  9. साँस छोड़ने के बाद अबकी बार बाये छिद्र को बंद कर दाहिने छिद्र से धीरे धीरे साँस ले।
  10. साँस लेने के बाद दोनों छिद्रो को बंद कर साँस रोके।
  11. अबकी बार साँस को बायीं छिद्र से निकाले।
  12. इसी चक्र को दोहराते रहे शुरू के दिनों में 2 -4 मिनट तक करे। दिन प्रतिदिन कुछ समय बढ़ा कर बाद में रोजाना 10 मिनट तक करे।

नाड़ीशोधन (अनुलोम विलोम) प्राणायाम के लाभ –

  1. नाड़ीशोधन  प्राणायाम को करने से शरीर के रक्त की अशुद्धियां दूर होती है और शरीर में भरपूर ऑक्सीजन जाती है जिससे रक्त चाप भी ठीक रहता है।
  2. अगर आपके सर में दर्द रहता है या आप ज्यादा समय ऑफिस में या कही और काम करते है तो अनुलोम विलोम प्राणायाम को करने से सर दर्द से आराम मिलता है तथा दिन भर शरीर में ताजगी बनी रहती है।
  3. श्वास संबंधी समस्या दूर होती है जैसे – दमा इत्यादि। श्वसन प्रणाली भी सुचारू रूप से काम करने लगती है।
  4. शरीर में कही दर्द होता हो (पुराना दर्द) तो कुछ दिन अनुलोम विलोम प्राणायाम के  लगातार करने पर दर्द  खत्म हो सकता है क्योकि इस प्राणायाम के करने पर शरीर में ऊर्जा प्रवाह अच्छा होता है।
  5. नाड़ीशोधन प्राणायाम से शरीर में ऑक्सीजन की कमी नही होती है जिससे मांसपेशियां भी स्वस्थ व मजबूत होती है।
  6. तनाव या चिंता जो की आम समस्या हो गयी है को काम करता है।
  7. आपके ध्यान व मन की एकाग्रता  में वृद्धि करता है।

नाड़ीशोधन (अनुलोम विलोम) प्राणायाम में सावधानिया –

  1. दूषित वातावरण या बंद कमरे या काम वायु वाली जगह पर व्यायाम न करे।
  2. शुरुवात में श्वास को धीरे धीरे ग्रहण करे और छोड़े।
  3. शुरुवात में श्वास को काफी देर तक न रोके बल्कि शुरुवात में काम और बाद में श्वास रोकने के समय को बढ़ाते जाये।
  4. शोर गुल वाली जगह पर प्राणायाम न करे। शांत व स्वच्छ जगह पर ही करे।
  5. अनुलोम विलोम प्राणायाम जल्दीबाजी में ना करे बल्कि आराम और स्थिर मन से करना चाहिए
  6. नाड़ीशोधन प्राणायाम रोजाना करे। गैप न करे । जैसे – 1 दिन किया और 2 दिन नही। या 2 दिन किया तो 1 दिन नही। ऐसा नही करे।
  7. श्वास को हद से ज्यादा देर तक नही रोके रहना चाहिए।
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Sarthak Upadhyay is a health blogger and creative writer, who loves to explore various facts, ideas, and aspects of life and pen them down. The whole site is managed by him. Writing is his passion and enjoys writing on a vast variety of subjects. Periods, pregnancy, and Home-remedies are his specialty areas.

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