बवासीर और एनल फिशर (गुदा मार्ग में दरार) ठीक करने के लिए योगासन

बवासीर (piles) बहुत दर्दनाक होता है। खासकर, जब इस समस्या के साथ-साथ अगर आपके गुदा मार्ग में कोई कट (cut) या दरार (एनल फिशर) आ जाए तो व्यक्ति का जीना हराम हो जाता है। अगर बात की जाए एनल फिशर (Anal fissures) और बवासीर को दूर करने की तो इलाज के साथ-साथ योग इस के लिए बढ़िया विकल्प है। बवासीर की समस्या अकसर कब्ज (Constipation) के होने, मल त्याग करते समय मल का कड़ा होने की वजह से होती है। लेकिन, कई बार गलत खान-पान भी बवासीर की समस्या के लिए जिम्मेवार होता है।

बवासीर की वजह से आपको गुदा मार्ग में जलन, खुजली, लाल चकते, और खूनी दस्त का सामना करना पड़ सकता है। अगर हालत और भी ज्यादा खराब हुई तो ब्लड लास (Blood loss) के चलते एनीमिया (Anaemia), भगन्दर (Fistula) जैसी कई गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, उचित यही होगा कि आप समय रहते इसका जल्द से जल्द इलाज कर लें। और आज हम इसी विषय में आपको योग के जरिये पाइल्स का इलाज करने के बारे में बताएंगे। सभी योगासन बवासीर और एनल फिशर (गुदा मार्ग में दरार) को आसानी से ख़त्म कर सकेंगे।

  • अगर आप सभी योग दिन में 6 से 7 बार करते हैं तो यह और भी ज्यादा फायदेमंद होगा।
  • आसन करते समय आपको सही विधि का प्रयोग करना पड़ेगा।
  • अगर बवासीर की स्थिति गंभीर हो जाती है, तो रक्त के अनियमित स्राव के चलते एनीमिया भी हो सकती है|

अर्श के लिए वज्रासन – Vajrasana for piles

वज्रासन की मदद से पाइल्स (piles) यानी अर्श का इलाज कम समय में किया जा सकता है। दरअसल, इस आसान को करने से हमारे शरीर में पेट के निचले हिस्से के रक्त का बहाव कंट्रोल (controll) हो जाता है और इस तरह बवासीर से भी आराम मिलता है। 

  • अपने पैरो को अंदर की तरफ मोड़कर चटाई पर रीढ़ सीधी कर ऐसे बैठें की आपके पैर की एड़ियां आपके हिप्स (Hips) से टच (Touch) हों और गुदा मार्ग की रास्ता आपके दोनों पैर के बीच से हो। बिल्कुल दिखाए गए तस्वीर की तरह।
  • आपका घुटना, टांग और एड़ियां तीनों एक ही दिशा पर होने चाहिए और आपकी पीठ और सिर पूरी तरह से सीधा होना चाहिए।
  • अपने दोनों हाथों को अपने घुटनों पर बड़े ही सरलता से रखें।
  • इस स्थिति पर लगभग 10 मिनट तक अपनी पोजीशन (Position) बनाए रखें।

यह आसन कुछ ही दिनों में आपके बवासीर और एनल फिशर (Anal fissure) की समस्या को काफी हद तक ठीक आकर देगा।

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मलासन – Malasana

यह आसान पूरी तरह से मल त्याग करने वाले पोजीशन से जुड़ा है।

  • अपने दोनों पैरो को कुछ दूरी में फैलाकर मल त्याग करने वाली स्थिति पर बैठ जाएं।
  • अब आप अपनी पीठ और सिर को आप पूरी तरह से सीधा कर लें।
  • दोनों हाथ को जोड़कर नमस्कार वाली स्थिति बनाएं।
  • इस स्थिति में आप लगभग 10 से 15 मिनट बिताएं। यह आसन आपके शरीर के ब्लड सर्कुलेशन (Blood circulation) को बेहतर बनाता है और आपके बवासीर को दूर करता है। यह पेट के निचले हिस्से को भी रिलैक्स (Relax) करता है जिससे आपके गुदा मार्ग में आया कट (Anal fissures) आसानी से दूर हो जाता है।

मूलबंधासन– Moolbandhasana

यह शरीर की एनर्जी (Energy) को कंट्रोल (Control) करता है। दरअसल, बवासीर होने की एक वजह आपके पेट और पेट के निचले हिस्से में होना वाला दवाब भी है। मूलबंधासन की मदद से इस दबाव को आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके अलावा यह पेल्विक मसल्स (Pelvic muscles) को भी बेहतर बनाती है जिससे गुदा मार्ग की प्रक्रिया में भी सुधार देखने को मिलता है। आइये इसे करने के तरीके के बारे में जानते हैं।

  • सबसे पहले आप चटाई बिछाकर पालथी मारकर सीधा बैठ जाएं। ध्यान रहे आपके रीढ़ पूरी तरह से सीधी होनी चाहिए।
  • अब आप अपनी आंखें बंद कर लें।
  • अपने दोनों हाथों को अपनी पालथी के ऊपर रखकर ध्यान मुद्रा में आ जाएं।
  • अब आप गहरी सांस लें और धीरे-धीरे श्वास को बाहर निकालें।
  • इस yoga को 10 मिनट के लिए ही करें।

जैसा की यह आसन पूरी तरह से आपके श्वास पर आधारित है। इसलिए, बवासीर और एनल फिशर (Anal fissure) का इलाज करने के लिए यह बढ़िया विकल्प है।

बालासन – Balasana

इस आसान के नाम से ही पता चल जाता है कि यह मुद्रा कहीं न कहीं छोटे बच्चे से जुडी हुई है। यह आसन कब्ज दूर करता है और नर्वस सिस्टम (Nervous system) को भी बेहतर बनाता है जिससे आपके गुदा मार्ग को बहुत आराम मिलता है और आपके पाइल्स (piles) की समस्या भी दूर होती है। यह एनल फिशर (Anal fissure) को दूर करने के लिए बहुत बेहतर योगासन है।

  • चटाई बिछाकर वज्रासन वाली स्थिति पर आ जाएं।
  • अब आप अपने कमर के ऊपर वाले हिस्से को पूरी तरह से आगे की तरफ झुका दें।
  • अपने दोनों हाथों को आगे की ओर कर लें। आप देखेंगे कि आप पूरी तरह से छोटे बच्चे के सोने वाली स्थिति पर पहुंच गए हैं। इसलिए, इस आसन को बालासन के नाम से जाना जाता है।
  • आप इस आसन को लगतार 10 मिनट तक करें।

सर्वांगासन – sarvangasana

यह आसन एक साथ कई तरह के फायदे देता है इसलिए, इसे सर्वांगासन के नाम से जाना जाता है। यह पाइल्स (piles) और एनल फिशर (Anal fisher) का इलाज करने के साथ-साथ आपके दिमाग को भी तीव्र करता है। इसे करने से आपके स्वास्थ्य को और भी कई तरह के फायदे मिलते हैं। आइये जानते हैं इसे करने की पूरी विधि।

  • एक बड़ी सी चटाई बिछाकर सीधा लेट जाएं।
  • ध्यान रहे! आपके पैर और आपका हाथ पूरी तरह से सीधा होना चाहिए।
  • अब आप अपने दोनों पैरो को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
  • जब पैर को कुछ ऊपर उठा लें तो अपने हाथों से अपने कमर को सहारा दें।
  • अब धीरे-धीरे अपने दोनों पैरो को ऊपर तक ले जाइए। जैसे तस्वीर में दर्शाया गया है।
  • अब आपके शरीर का पूरा बल आपके कंधे पर होगा।
  • इस आसन को 1 मिनट ही करें। लेकिन, आपको एक घंटे में इस आसन को कम से कम 10 बार करना है।

आप महसूस करेंगे कि कुछ ही दिनों में आपका अर्श (piles) काफी हद तक ठीक हो गया है और आपके गुदा मार्ग का कट (cut) यानी Anal fissure भी पूरी तरह से खत्म हो गया है।

पादहस्तासन – Padahastasana

यह आसन आपके पेट के मसल्स (muscles) को रिलैक्स (Relax) करता है जिससे बोवेल मूवमेंट (Bowel movement) ठीक हो जाता है और बवासीर से आराम मिलता है। यह आसन एनल फिशर (Anal fissures) के लिए भी बेहद उपयोगी है।

  • पादहस्तासन करने के लिए आप आप हरी घांस या किसी चटाई में सीधा खड़े हो जाएं।
  • अब आप अपने दोनों हाथों को ऊपर कर लें और एक गहरी सांस लेकर सांस को धीरे-धीरे छोड़ें।
  • अब अपने कमर को झुकाते हुए अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाएं।
  • ध्यान दें आपके घुटनें पूरी तरह से सीधे होने चाहिए।
  • अब अपने हाथों की उगलियों की मदद से अपने फीट (feet) को टच (touch) करने की कोशिश करें।
  • अब इस स्थिति में लगातार 1 मिनट तक बने रहें। यह आसन आप आधा घंटे में कम से कम 5 से 8 बार दोहराएं।

यकीन करिए, अगर आपकी बवासीर ज्यादा तीव्र नहीं हुई है तो यह आसन आपकी इस समस्या को बहुत जल्दी ही ख़त्म कर देगा।

अश्विनी मुद्रा – Ashwini Mudra

 यह मुद्रा आपके गुदा मार्ग की मसल्स (Muscles) को कंट्रोल (Control) करता है। जब आप इस योग को करेंगे तो आपको इसका रिजल्ट (Result) मात्र 14-15 दिनों में ही नजर आ जाएगा।

  • पालथी मारकर चटाई पर सीधा बैठ जाएं।
  • अब अपने दोनों हाथों को ध्यान मुद्रा में लाएं।
  • अपनी आँखों को बंद कर लें और अपना पूरा ध्यान गुदा मार्ग की तरफ केन्द्रित करें।
  • अब आप बिना किसी बल के अपने गुदा के आस-पास की मसल्स को ऊपर की तरफ खींचने का प्रयास करें और सामान्य स्थिति पर आ जाएं |
  • इस मुद्रा को आप दिन में कई बार करें।

पवनमुक्तासन – pavanmuktasana

यह आसन आपके पेट के कब्ज को दूर करता है और गैस (Gas) को बाहर निकालता है। इसके साथ यह आसन आपके गुदा की मसल्स (Muscles) को भी रिलैक्स (Relax) करता है जिस वजह से इस आसान की मदद से पाइल्स (Piles) रोगी को बहुत ज्यादा राहत मिलती है। इसे करना बेहद आसान है।

  • सबसे पहले आप अपने पूरे शरीर को ढीला कर पीठ के बल सीधा लेट जाएं।
  • अब आहिस्ता-आहिस्ता सांस लेते हुए अपने घुटनों को मोड़ लें और दोनों हाथों की मदद से अपने घुटने को अपनी छाती तक ले आएं। अब अपने सिर को घुटने में टच (Touch) कराने की कोशिश करें। ध्यान रहे, इस दौरान आप अपनी सांस को कुछ सेकंड्स के लिए रोकने की कोशिश करें।
  • इस दौरान आपको आपके गुदा मार्ग में तरह-तरह की हलचल महसूस होगी जो आपको काफी पसंद आएगी।
  • अब आप अपने सांस को धीरे-धीरे छोड़ते हुए सामान्य स्थिति पर चले जाएं।
  • इस आसन को आप लगभग 8 से 10 बार जरूर करें।

बवासीर और एनल फिशर के लिए विपरीत करणी योग – Viparita Karini for piles and Anal fissures

यह आसन आपके गुदा मार्ग में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है और आपको भगन्दर, पाइल्स (Piles) और एनल फिशर से राहत दिलाने में बहुत ज्यादा मददगार होता है। इसे करना भी ज्यादा कठिन नहीं है। इसके अलावा भी इस योग से शरीर के नर्वस सिस्टम (Nervous system) को काफी ज्यादा फायदा मिलता है। आइये इसे करने का तरीका जानते हैं।

  • फर्श या जमीन पर एक साफ़ चटाई बिछाकर सीधा लेट जाएं।
  • आपका हाथ पूरी तरह से ढीला होना चाहिए और शरीर के निचले हिस्से के दिशा पर होने चाहिए।
  • अब आप अपने दोनों घुटनों को एक साथ धीरे-धीरे इस तरह उठाएं की आपका कमर एक केंद्र हो जाए और शरीर तथा पैर मिलकर 90 डिग्री का एक कोण तैयार करें।
  • इस स्थिति में आप कुछ देर तक रहें। इसके लिए आप अपने हिप्स (Hips) के नीचे तकिया या कम्बल को लगा सकते हैं।
  • इस आसन को आप दिन को कम से कम चार बार जरूर करें।

पाइल्स (बवासीर)  और गुदा मार्ग में दरार के लिए मयूरासन योग – Mayurasana for piles and Anal fissures

यह आसन आपके पूरे शरीर में रक्त संचार को सुचारु करता है और पेट दर्द, कब्ज जैसी कई समस्याओं को दूर करने के लिए जाना जाता है। दरअसल, यह गुदा मार्ग के आस-पास भी रक्त संचार को बेहतर बनाता है और लीवर के लिए भी फायदेमंद होता है।

  • इस आसन को करने के लिए आप पेट के बल सीधा लेट जाएं।
  • अब अपने हाथ के पंजे को जमीन या फर्श पर रखें और कोहनियों को पेट के अगल-बगल ले जाएं।
  • कोहनियों और पंजों पर जोर देते हुए आप अपने शरीर को उठाने की कोशिश करें।
  • एक ऐसा वक्त आएगा जब आपका पूरा शरीर सिर्फ कोहनियों और पंजों की मदद से हवा में होगा।
  • इस दौरान आपके शरीर में बहुत सारी हलचल होंगी और रक्त संचार भी स्वस्थ होगा। जिस वजह से आपका बवासीर और एनल फिशर (Anal fissure) भी ठीक होगा।

अनुलोम-विलोम – Anulom vilom

यह प्राणायाम बाबा रामदेव द्वारा बताया गया है। बाबा रामदेव के अनुसार अनुलोम-विलोम मात्र एक महीने के भीतर पाइल्स (Piles) या बवासीर के समस्या को काफी हद तक कम कर देता है। यह प्राणायाम इस दौरान होने वाले दर्द को भी कम करता है और एनल फिशर (Anal fissure) की प्रॉब्लम (Problem) का खात्मा करता है।

  • इसे करने के लिए आप अपनी दोनों आँखें बंद करके ध्यान मुद्रा पर बैठ जाएं।
  • अब अपने दाएं हाथ के अंगूठे को नाक के दाएं छिद्र पर रखें |
  • नाक के बाएं छिद्र से आप गहरी सांस लें।
  • अब अपनी अनामिका उंगली से अपने नाम का बायां छिद्र दबाएं और दाएं छिद्र से सांस छोड़ें।
  • ऐसे ही आप दुबारा यही प्रक्रिया अपनाएं।
  • इस प्राणायाम को आप लगातार 10 मिनट तक करते रहें।

निष्कर्ष – conclusion

योग की मदद से बवासीर को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। ऊपर बताए गए योग एनल फिशर यानी गुदा मार्ग पर आए कट्स (cuts) या दरार को भी ठीक कर सकते हैं। बशर्ते, आपको इनमें से किसी भी एक योग को दिन में कम से कम 6 से 7 बार करना पड़ेगा। आप चाहे तो हर बार किसी नए योग का चयन कर सकते हैं।

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Sarthak upadhyay
Sarthak upadhyay is a health blogger and creative writer, who loves to explore various facts, ideas, and aspects of life and pen them down. sarthak is known with English and hindi. Writing is his passion, and enjoys writing on a vast variety of subjects. Relationship, Astrology, and entertainment, Periods, pregnancy, and Home-remedies are his specialty areas.

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