अगर रखना चाहते हैं अपना जीवन स्वस्थ, तो शामिल करे इन बातों को अपने जीवान में ||

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नोट: इसे पूरा पढ़े आज के समय में एक अच्छे स्वस्थ के लिए यह लेख बहुत ही आवश्यक है, इस लेख को बाबा रामदेव के द्वारा बताया गया है | 
 
मानव शरीर ईश्वर की अमूल्य देन है | जिसे स्वस्थ रखना हमारा पहला कर्तव्य होना चाहिए | हमारा शरीर जब भोजन ग्रहण करता है तो उसका पाचन होता है | जिससे रक्त बनता है, और जो भी अपशिष्ट बचता है, वह शरीर के विभिन्न मार्गो के द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है | और यदि पूरा का पूरा अपशिष्ट शरीर से बाहर निकाल दिया जाये तो हमारा शरीर स्वस्थ रहेगा अन्यथा हम रोगी हो जायेगे | ‘अगर रखना चाहते हैं अपना…………………………………. जीवन स्वस्थ, तो शामिल करे इन बातों को अपने जीवन में’ स्वस्थ रहने के लिए यह अति आवश्यक है, कि हम स्वस्थ्य रक्षा के सामान्य किन्तु महत्वपूर्ण नियमो को जाने और उन्हें पालन करे | तो आज हम कुछ महत्वपूर्ण नियमो के बारे में चर्चा करेंगे | 

 
स्वास्थ्य रक्षा के मुख्य आधार
  • ·       स्वस्थ्य रक्षा के मुख्य 5 आधार स्तम्भ है :-
  • ·       भोजन
  • ·       शारीरिक मेहनत
  • ·       आराम
  • ·       मानसिक संतुलन और
  • ·       प्राकृतिक पंच महाभूतों का सेवन 

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भोजन
भोजन करते समय यह प्रश्न मन में जरूर करें कि हम १ क्या खाए ? २ कब खाए ? 3 कैसे खाए और कितना खाए ?
 
   १ क्या खाए ?
मनुष्य के दांतों के बारे में अध्ययन करे तो पता चलता है की मनुष्य में फाड़ने वाले दन्त की संख्या कम है और काटने वाले ज्यादा इसलिए हमे काट कर खाये जाने वाले भोजन लेने चाहिए | जैसे कि कंद, मूल और फल और दूध | लेकिन आजकल कंद और मूल का मिलना कठिन हो गया है, और फल और दूध  महगे होते जा रहे है | लेकिन मौसमी फल बारहों महीने मिलते है, और साग-सब्जी भी मिलती ही है | भोजन में अन्न की मात्र बढना मांसाहार से तो ठीक है, लेकिन फलाहार से नही | .क्योंकि फलो और दूध को पचाने में कम उर्जा की क्षय होती है | इसलिए हमे ज्यादा से ज्यादा कंद-मूल फल और दूध का सेवन करना चाहिए | आहार में अन्न भी शामिल किया जा सकता है, लेकिन मात्रा कम ही रखा जाये तो अति उत्तम होगा | हमे कोशिश करनी चाहिए, कि प्रकृति ने जो वस्तु जिस रूप में पैदा की है, उसे उसी रूप में खाया जाये | “अगर रखना चाहते हैं अपना…………………………………. जीवन स्वस्थ, तो शामिल करे इन बातों को अपने जीवन में” भोजन को तलना, भूनना हानिकारक है | हमे अपनी स्वाद और पोषण तत्वों की रक्षा दोनो में संतुलन बनाना ही चाहिए | घी, तेल, गुड, और सुगर का सेवन कम ही करें तो अच्छा होगा | मौसमी फल अपने मौसम में सस्ते होते है, और खूब मिलते है, जिनका भरपूर उपयोग करना चाहिए |
·       एक साथ अनेक प्रकार के भोजन करने से बचे |
·       भूख कम होने पर अल्पाहार या तरल पेय उत्तम है |
·       सात्विक आहार ही ले | तामसिक आहार से बचे |
·       अपने स्वाद पर नियंत्रण रखे, और बच्चो को मिर्च-मसाले के स्वाद से बचाएं |
·       स्वाद भूख की होती है, इसलिए बिना तेज भूख लगे भोजन न करें |

    कब खाए ?
क्या खाए ? का सीधा सम्बन्ध हमारी भूख से है | जब हमारे आमाशय में पाचक रस स्त्रावित होता है, तब हमे भूख लगने का अहसास होता है, और हमे भूख लगती है | तब हमे भोजन करना चाहिए जिस प्रकार आग में गीली लकड़ी डाली जाती है, तब धुआं उठता है | इसी प्रकार बिना अच्छी भूख लगे भोजन करते है, तो हम गैस, कब्ज, आदि, पेट के रोगों के शिकार हो जाते है | इसलिए कब खाएं ? का सरल और सीधा नियम है, की भूख न लगने पर भोजन न किया जाये | आप यह नियम ध्यान में रखें कि : खाऊ की न खाऊ _तो न खाए | और फ्रेश होने के लिए जाऊ की न जाऊ _ तो जरूर जाएँ |
     कैसे और कितना खाएं ?
भोजन आराम से, शांत मन से और मन लगा कर करना चाहिए | दुखी मन से जल्दी-जल्दी भोजन न करें | बहुत जरूरी हो तब जूस आदि हल्के भोजन ही लें | रोटी आदि कड़े भोजन को खूब चबा कर ही खाएं | यदि पेट में पुराना भोजन ही पड़ा हुआ महसूस हो, अर्थात पेट भारी महसूस हो तब भोजन न करें | आहार की मात्रा में सयंम जरूर रखें | स्वादिष्ट भोजन को ज्यादा खा लेने पर पाचन में कठिनाई होती है, औए पेट के रोग पैदा होते है | इसलिए जरूरत से ज्यादा न खाए, और मिताहारी बनें | 
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शारीरिक मेहनत जरूर करें
जो व्यक्ति शारीरक मेहनत करते है, उनकी पेट की साइज़ ज्यादा नही बढती है, और मोटापा से बचे रहते है | मेहनत न करने और दिन भर बैठे रहने से तोंद निकल आती है | और मोटापा बढ़ जाता है | इसलिए मानसिक काम करने के साथ-साथ शारीरिक मेहनत जरूर करें | मेहनत करने में कमी और सुख सुविधाओं के बढने के कारण आज-कल गाँव के लोग भी हार्ट आदि के रोगों से प्रभावित हो रहे है | आज जो घर बैठे जितना ज्यादा पैसा कमाता है, उसे ही मेहनती समझा जाता है | लेकिन शारीरिक मेहनत के आभाव में लोग रोगी होते जा रहे है | इसलिए स्वस्थ जीवन जीने के लिए शारीरिक मेहनत को अपने दिनचर्या में जरूर शामिल करें | शारीरिक मेहनत के लिए आप गार्डनिंग,साइकिलिंग आदि शामिल करें |

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 आराम भी जरूरी है
दिन भर मेहनत करने से थके हुए व्यक्ति के लिए आराम करने के बाद पूरे शरीर में स्फूर्ति का संचार हो जाता है | जिस प्रकार बैटरी डिस्चार्ज होने पर फिर से चार्ज करके उपयोग में लाई जाती है, उसी प्रकार शरीर के डिस्चार्ज हो जाने के बाद पूरी नींद लेकर पुनः चार्ज करना जरूरी होता है | आराम कर लेने से शरीर में नए cells बनते है | इसलिए जरूरी है कि विश्राम जरूर करें | छोटे बच्चे 11-12 घंटे सोते है, किशोर8-9घंटे, youth 8 घंटे, adult 6-7 घंटे और वृद्ध 4-6 घंटे सोते है | युवा मनुष्य को प्रतिदिन 8 घंटे जरूर ही सोना चाहिए | आहार के साथ विश्राम दोनों ही समान महत्व रखता है, इसलिये पर्याप्त नींद जरूर ही लें |
 
मानसिक संतुलन बनाये रखें
शरीर के पोषण के साथ-साथ मानसिक आहार भी जरूरी होता है | यदि हम मनोरंजन के लिए गंदे साहित्य पढ़े, गंदे फिल्म देखें, कानो से लोगो कि बुराईयों को सुने, तो हममे लोभ, क्रोध, आदि मानसिक विकार बढ़ेंगे और हमारा मन शांत और स्थिर नही रह सकेगा | और मन के खिन्न रहने पर हमारी सामाजिक और शारीरिक परेशानियाँ बढ़ेंगी | इसलिए जीवन में संतुलन बनाये रखने के लिए मन का संतुलन साधकर रखना जरूरी होता है | इसके लिए आप प्रार्थना, भजन, ध्यान, योग,अच्छी पुस्तकों का स्वाध्याय कर सकते है |

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प्राकृतिक पंच-महाभूतों का सेवन

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प्रकृति के पांच वरदान है, आकाश, वायु, सूर्य का प्रकाश, जल, और पृथ्वी |
·       आकाश तत्व प्राप्त करने के लिए शरीर को ज्यादा से ज्यादा खुला रखने कि कोशिश करनी चाहिए ज्यादा टाइट कपड़े पहनने से स्किन डिजीज होते है, और  साँस लेने में कठिनाई होती है | इसलिए ढीले कपड़े पहना  कीजिये |
·       वायु के बिना जीवन ही सम्भव नही है इसलिए खुले स्थान पर ताजी वायु का सेवन नित्य करने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है |
·       सूर्य के प्रकाश में विटामिन D का संश्लेषण बढिया होता है इसलिए सूर्य स्नान किया कीजिये |
·       जल तो जीवन का आधार ही है, और शरीर की सफाई के लिए जरूरी भी है | इसलिए प्रतिदिन 3 लीटर तक पानी पीने को अपनी दिनचर्या में शामिल करें |
·       पृथ्वी अर्थात मिटटी के सम्पर्क में भी रहना चाहिए | जैसे कि ओस वाली घास पर नंगे पैर चलने से आँखों की रौशनी बढती है |

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