धात की दवा spermatorrhoea dhat rog ki dawa, ilaj aur upay patanjali nuskhe

धात (धातु) रोग ठीक करने की दवा, पतंजली उत्पाद, योग और घरेलू उपाय

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अंग्रेजी में Spermatorrhoea नाम से जाने जाना वाला धातु रोग दिन-ब दिन नवयुवकों को अपनी चपेट में ले रहा है। धात रोग की चपेट में आ जाने के बाद मनुष्य का जीवन नरक बन जाता है, क्योंकि व्यक्ति इस समस्या से घिर जाने के बाद शारीरिक कमजोरी का शिकार हो जाता है। कोई बात नहीं! तनाव लेने की जरूरत नहीं है! आज हम आपको धात गिरने की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए आप तक इस रोग की आयुर्वेदिक, पतंजली, अंग्रेजी और होम्योपैथी दवा बताएँगे। इसके साथ हम पेशाब में धात गिरने का घरेलू इलाज और उपचार के बारे में भी चर्चा करेंगे।

क्या होता है धात (धातु) का गिरना

धातु रोग को पुरुष प्रमेह नाम से भी जाना जाता है।इस रोग के होने के बाद मरीज का वीर्यपात उसकी बिना इच्छा के हो जाता है। धात गिरने का कोई समय नहीं निर्धारित होता है। वीर्यपात अचानक से कभी भी हो जाता है, फिर चाहे रोगी सो रहा हो या जाग रहा हो।हालाँकि इसमें रोगी की क्षति नहीं होती है। क्योंकि गिरने वाले तरल चिपचिपे पदार्थ में वीर्य की मात्रा बिलकुल भी नहीं पाई जाती है और इस तरह से रोगी का स्वास्थ्य ज्यादा प्रभावित नहीं होता है।

लेकिन, अगर धातु एक हफ्ते में अगर कई दफा गिरती है तो यह बात विचारणीय है। क्योंकि, यह आपके और किसी दुसरे रोग का कारण हो सकता है। ऐसे में आपको जाँच करानी चाहिए

धातु (धात) रोग के कारण

धात गिरने के कई कारण हो सकते हैं। कुछ ख़ास वजहों को हम नीचें पॉइंट्स की मदद से बता रहे हैं जो धातु रोग के लिए जिम्मेदार कारण कौन-कौन से हैं।

  • मन में हमेशा अश्लील विचार को संग्रहित रखना
  • आपके दिमाग का कोई हार्मोनल कंट्रोलिंग हिस्सा कमजोर होने की वजह से
  • शरीर में आवश्यक पोषक-तत्वों की कमी होना
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर होना
  • तनाव, दुःख और अधिक उत्साह भी धात रोग के कारण हैं
  • यौनक्रिया को प्रेरित करने वाली कुछ नसों का कमजोर पड़ जाना, जिससे आकस्मिक वीर्यपात हो जाना सामान्य बात है।
  • ज्यादा हस्तमैथुन करना (हफ्ते में दो बार से ज्यादा होने पर!)
  • हो सकता है आपका सीमन बहुत पतला हो
  • अगर आपकी किसी बीमारी की दवाई चालू है

धात (धातु) गिरने का लक्षण

हम नीचे धातु रोग के लक्षण बताएंगे, जिनके नजर आने पर आपको तुरंत एक टेस्ट के लिए जाना चाहिए।

  • अगर आपके औजार के मुंह से अक्सर चिपचिपा तरल पदार्थ बाहर निकलता है
  • आपका सीमन जरूरत से ज्यादा पतला होने पर, भले ही आप हफ्ते में एक ही दिन हस्तमैथुन कर रहे हो (हस्तमैथुन रोज करने पर यह लाजिमी है)
  • छोटी-छोटी बातों पर अक्सर गुस्सा हो जाना और तनाव ले लेना
  • धीरे-धीरे शरीर का कमजोर होना प्रतीत होता है
  • अंडकोष में अक्सर दर्द होने पर
  • शरीर सुस्त रहने लगता है और हर वक्त शरीर थका हुआ महसूस होता है
  • याद रखने में परेशानी होने पर
  • यौनक्रिया पर जरा सा भी रूचि न होना
  • शरीर के कई अंगों में कपकपी (ज्यादातर हाँथ और पाँव में)
  • श्वास और पेट संबंधी समस्याओं का जारो रहना
  • दिल की धड़कन में परिवर्तन
  • भूँख में कमी आ जाना और आँखों के नीचे अक्सर काले घेरे बन जाना

विशेषतः हम आपको धात गिरने की आयुर्वेदिक, होम्योपैथी और एलोपैथी दवा के बारे में बताएँगे। लेकिन, याद रहे इनको प्रयोग में लाने से पहले आप पंसारी या डॉक्टर से एक बार सलाह जरूर लें।

धात गिरने से रोकने की दवा

धात गिरना रोकने की आयुर्वेदिक दवा

Rajata chandrodaya

यह दवा शरीर की शक्ति को बढ़ाती है और अशुद्धियों को साफ करती है। यह आपके धात को गिरने से भी रोकती है और कई तरह की यौन समस्याएँ, जैसे- शीघ्रपतन, शारीरिक कमजोरी आदि को सही करती है। डोज- सुबह और शाम दो दो टेबलेट नाश्ता और डिनर के बाद।

राजता चंद्रोदय एक आयुर्वेदिक फ़ॉर्मूला है जो कई तरह के प्रभावी खनिज की मदद से तैयार किया जाता है। इसके निर्माण में प्रयोग की जाने वाले विशेष जड़ी-बूटी सुधा राजता, सुधा परदा और सुधा गन्धका।

इसका निर्माण शब्द दो शब्दों के मेल से हुआ है – राजता और चंद्रोदय। राजता का अर्थ चांदी को दर्शाता है और चंद्रोदय शरीर की शानदार चमक और सुंदरता को दर्शाता है।

Poornachandrodaya

यह दवा मुख्य रूप से उन पुरुषों के लिए तैयार की गई है जिनकी उम्र 20 से तीस वर्ष की है और वो कामुकता कमजोरी और धात गिरने की समस्या से पीड़ित हैं। अपने यौनक्रिया को बेहतर बनाने के लिए इसे महिला और पुरुष दोनों ही बिना किसी साइड-इफेक्ट्स के इस्तेमाल कर सकते हैं।

poornachandrodaya स्वर्णभस्म, सुधा परदा और सुधा गंधक से मिलकर तैयार होती है। आप इसकी एक टेबलेट सुबह व शाम राजता चंद्रोदय के इस्तेमाल करने के बीस मिनट बाद पानी के साथ खाएंं।

ASWAGANDHAADI LEHYA (केवल गैर-मधुमेह रोगियों के लिए)

धातु रोग का इलाज के लिए ASWAGANDHAADI LEHYA को ऊपर की दो दवाओं को उपयोग में लाने के आधे घंटे बाद प्रयोग करना है।लेकिन, ख्याल रहे की अश्वग्न्धी लेहम को वही लोग उपयोग कर सकते हैं जो डायबिटीज से ग्रसित न हो!

ASWAGANDHAADI LEHYA के घटक
  • अश्वगंधा (रूट)
  • जतिफल (फल)
  • पिप्पली (फ्रूट स्पाइक)
  • सौन्थी (Rhizome)
  • मरिचा (फल)
  • इला (बीज)
  • चाविका (रूट)
  • विदंगा (फल)
  • कुश्ता (रूट)
  • लवंग (कली)
  • वंसलोचन (नमक)
  • सरिबा (रूट)
  • रसना (प्रकंद)
  • मुसली (Rhizome)
  • जीरा (फल)
  • कृष्णा जीरा (फल)
  • सतवारी (टब। जड़)
  • यवनिका (बीज)
  • पिप्पलीमुल्ला (स्टेम)
  • विदारी (प्रकंद)
  • कछुरा (प्रकंद)
  • हरिबेरा (रूट)
  • स्वेता पूर्णनावा (जड़ी बूटी)
  • चीनी
  • शहद
  • Ghruta

डोज- आप इस सिरप को डेढ़ चम्मच की मात्रा में रोज सुबह और शाम ऊपर की दो दवाइयों को उपयोग में लाने के बाद करें।

Draksharishta : (सिर्फ गैर-मधुमेह वाले)

यह बहुत अच्छी टॉनिक है जो मसल्स को बेहतर बनाती है और यौन समस्याओं के लिए भी प्रयोग की जाती है। यह धात गिरने के चलते हुए नुकसान को दूर करने का काम करती है और शारीरिक बल को पुनः स्थापित करती है।

इसे गर्भवती महिला, और छोटे बच्चे भी उपयोग कर सकते हैं। लेकिन, बच्चों के लिए डोज कुछ अलग होते हैं जिनकी जानकारी आपको वैद्य से ही लेनी होगी।

Draksharishta के घटक
  • द्राक्षा (फल)
  • डलचीना (छाल)
  • इला (बीज)
  • तेजपात (पत्ती)
  • नागकेसर (fl.bud)
  • प्रयांगु (फल)
  • पिप्पली (फल)
  • मरिचा (फल)
  • विदंगा (फल)
  • गुड़

डोज- खाना खाने के बाद चार चम्मच पानी और सिरप की बराबर मात्रा के साथ सुबह और शाम दोनों टाइम लें।

धात गिरने की पतंजली दवा, टेबलेट और पाउडर

पतंजली अश्वशिला कैप्सूल

बाबा रामदेव द्वारा पतंजली की यह दवा खासतौर पर धात की समस्या से लड़ने के लिए बानाया गया है। यह कई तरह की जड़ी-बूटियों (विशेष रूप से अश्वगंधा और शिलाजीत) को मिलाकर तैयार किया गया है जो स्पर्म क्वालिटी बेहतर बनाता है और पतले सीमन को मोटा कर धात का इलाज करता है।

इस टेबलेट को उन लोगों को नहीं खाना चाहिए जिन्हें ब्लीडिंग होती है और बाकी इसके कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं होते हैं।

डोज- भोजन के बाद दूध या पानी के साथ 1-2 कैप्सूल दिन में दो बार खाएंं।

पतंजली यौवन चूर्ण

पतंजली यौवन चूर्ण स्टैमिना बढ़ाता है यौन और शारीरिक दुर्बलता को दूर कर धात का इलाज करता है।

इसके घटक: सलाम पांजा, सलाम मिश्री, सफ़ेद मुशली, रुमीमस्तगी, क्षीरककोली, अश्वगंधा, गोंड कतीरा, पलाशा, बहमन सफेद, धर्मोहरा भस्म, बंग भस्म, लोहबान, बाबुल गोंड, ग्लूकोज, चीनी।

खुराक: एक चम्मच दिन में दो बार गुनगुने दूध के साथ।
नोट: मधुमेह के रोगियों इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

धात गिरने की होम्योपैथी दवा

PHOSPHORIC ACID Q

फॉस्फोरिक एसिड क्यू धात गिरने की समस्या के शीर्ष उपचारों में से एक है। यह लिं*ग की स्थिरता को दूर करने का भी काम करता है और यौनक्रिया की इच्छा जगाने का काम करता है। यह अंडकोष में होने वाले जलन और नसों कमजोरी को दूर करता है।

ANACARDIUM OR. 30

यह दवा उन्हें लेने की सलाह दी जाती है जो रात में बिना सपने के ही वीर्यपात का शिकार हो जाते हैं, एक तरह से यह अनावश्यक धातु गिरने से रोकने के लिए प्रयोग में लाइ जाती है।

DAMIANA Q

होम्योपैथी डॉक्टर्स अक्सर धात दूर करने की दवा के तौर पर DAMIANA Q लेने की सलाह देते हैं। जब अचानक से बिन बताए आपके पेशाब के थ्रू या कोई अलग माध्यम के जरिये धात गिरता है तो महसूस होने वाली कमजोरी को भी दूर करने के लिए इस दवा को लेने की सलाह दी जाती है

CONIUM MACULATUM 30

Spermatorrhoea को दूर करने के लिए यह दवा एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यह मनुष्य के दिमाग को शांत रखता है और कामुक विचार से दूर रखने में मदद करता है जिससे धात के गिरने के चांसेस बहुत कम हो जाते हैं।

Spermatorrhoea के लिए अन्य होम्योपैथी दवाएँ

SELENIUM 30, CALADIUM  Q, AGNUS CASTUS 30, BUFO RNA 30-Bufo rana, STAPHYSAGRIA 30, LYCOPODIUM CLAVATUM 200, NUX VOMICA 30, KALI BROMATUM 30, LUPULINUM 1X, और CALCAREA CARB. 30 कुछ ऐसी दवाएँ हैं जो धात को गिरने से रोकने में कामयाब हैं।

धात (धातु) गिरने की एलोपैथिक (अंग्रेजी) दवा

यह समस्या आपके दिमाग से जुडी हुई होती है, इसलिए इस समस्या का बेहतर निदान पाने के आयुर्वेदिक और होम्योपैथी दवा का ही प्रयोग करना चाहिए जो काफी कारगर होंगी।

हालाँकि, डॉक्टर्स अक्सर इस समस्या के लिए Depaxetine और seldinafil टेबलेट लेने की सलाह देते हैं। जबकि, seldinafil के कई साइड इफेक्ट्स होते हैं। जिनका सेवन आपको डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए।

धात गिरने का घरेलू इलाज और नुस्खे

भले ही हमने ऊपर Spermatorrhoea के लिए आपको होम्योपैथी और अंग्रेजी दवा बताई हो लेकिन, आपको सबसे पहले आयुर्वेदिक दवा और कुछ घरेलू नुस्खे को ही प्रयोग में लाना चाहिए। जो ज्यादा फायदेमंद होंगे और इनके शरीर पर कोई भी साइड इफेक्ट्स देखने को नहीं मिलेंगे।

गिलोय का रस

चमत्कारी प्रभाव देखने के लिए आप रोज 2 चम्मच शहद और 4 चम्मच गिलोय के जड़ की रस को मिलाकर सुबह व शाम खाली पेट लें, इससे धात पुष्ट होती है और यह किसी भी माध्यम से शरीर से बाहर नहीं जाती है।

आंवले का चूर्ण

रात में बिस्तर में जाने के आधा घंटे पहले आमले के दो चम्मच चूर्ण को एक पाव गाय के ठंडे दूध के साथ मिलाकर पीने से धातु रोग जड़ से सम्पात हो जाती है।

आमले का रस और शहद के मिश्रण से तैयार लिक्विड को सुबह खाली पेट पानी के साथ दो चम्मच की मात्रा में पियें, इससे भी आपको बहुत आराम मिलेगा और आपकी धातु नहीं गिरेगी।

तुलसी रस

तुलसी रस का प्रयोग कई तरह की यौन रोग में आयुर्वेद में किया जा रहा है। मात्र दो चम्मच की मात्रा में तुलसी का रस पानी के साथ मिलाकर सुबह नाश्ते के समय पीने से धातु रोग दूर होता है और व्यक्ति तरोताजा मश्सूस करता है।

यह आपके पूरे दिन की उर्जा और उत्साह को बरकरार रखने का काम करती है जो धात रोगियों के लिए बहुत आवश्यक है।

उड़द की दाल

अपने दैनिक आहार में अगर आप उड़द की दाल शामिल करते हैं तो इससे यौन दौर्बल्यता का समूल नाश होता है और आपकी धात हस्ट-पुष्ट एवं अडिग रहती है।

जामुन की गुठली का चूर्ण

जामुन के बीज को धुप में अच्छी तरह से सुखा लें और जब बीज पूरी तरह से सख्त हो जाए तो उसे कूँटकर उसका चूर्ण तैयार कर लें। एक चम्मच चूर्ण, दो ग्राम पीसी मिश्री और दूध को एक साथ मिलाकर रोगी को खिलाएँ।

बस कुछ ही हफ्ते! और फिर रोगी की धात गिरने की समस्या दूर हो जाएगी।

खजूर का सेवन

रात में सोने से पहले खजूर को पानी में भिगो दें और सुबह इसका सेवन दूध और गुड़ के साथ करें, यह धात दुर्बलता को दूर करता है और रोगी का इलाज कर बहुत जल्दी इस समस्या से बाहर निकालता है।

चंदन पाउडर

२ ग्राम चन्दन पाउडर, 4 ग्राम कहुआ (अर्जुन) की छाल का पाउडर एक कप पानी के साथ फाँकने से पेशाब की धात का इलाज किया जा सकता है। इसके साथ यह लिंग सम्बन्धी कई समस्याएँ जैसे- लिंग में जलन और दर्द आदि को भी दूर कर सकता है।

धात का इलाज के लिए योग

धात रोग के लिए कई योगासन है जिनमे से कुछ ख़ास योगसान हम आपको बताने जा रहे हैं जो बहुत कारगर है और वैज्ञानिक सिद्धांत पर कार्य करते हैं।

इसे भी पढ़ें- योग के फायदे

अनुलोम विलोम

Anulom-vilom-yoga pranayam

यह योग या प्राणायाम आपके दिमाग को शांत रखेगा और आपके मन से कामुक विचार दूर कर आपके स्ट्रेस को भी दूर रखेगा और यही वजह है की रोज सुबह दस मिनट अगर आप अनुलोम विलोम करते हैं तो आपको धात की समस्या से बहुत राहत मिलेगी।

इसे करने के लिए आप योग मुद्रा में बैठ जाएं और राईट अंगूठे की मदद से राईट नाक को दबाते हुए लेफ्ट नाक से लम्बी और गहरी सांस लें।अब अपने अंगूठे की बगल वाली दो अँगुलियों से लेफ्ट नाक को दबाते हुए राईट नाक से वायु को बाहर निकालें।

बालासन

a female doing balasana

यह योग आपके हार्मोनल संतुलन के लिए जाना जाता है जो धात का इलाज आसानी से कर सकता है। इसे करने के लिए आप ऊपर चित्र में दिखाएं गए पोज के अनुसार बैठ जाएं और योग करें।

तितली आसन

butterfly asana pose titli aasana

ऊपर दिखाएं गए तस्वीर के अनुसार बैठकर आप अपने दोनों पैरों को ऊपर नीचे करें। इससे आपके शरीर को कई तरह के फायदे होते हैं और आप धात से कोशों दूर हो जाते हैं।

इस तरह से आप ऊपर बताए गए धात रोग के लिए नुस्खे, तरीके, उपाय, दवा और टेबलेट को यूज करने के बाद आसानी से इस समय का इलाज कर सकते हैं। हमारे मनोबल को बढ़ाने के लिए आप इस लेख में प्रतिक्रिया दें। यदि आपको कोई प्रश्न है तो हमसे इस लेख में कमेन्ट के माध्यम से पूछ सकते हैं। इसे अपने सहपाठियों के साथ शेयर बटन की मदद से जरूर शेयर करें!!

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Sarthak Upadhyay is a health blogger and creative writer, who loves to explore various facts, ideas, and aspects of life and pen them down. The whole site is managed by him. Writing is his passion and enjoys writing on a vast variety of subjects. Periods, pregnancy, and Home-remedies are his specialty areas.

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