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15 मिनट में कब्ज दूर करने के लिए योग- Kabj ke liye yoga

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कब्ज एक ऐसी समस्या है, जिसके बाद व्यक्ति घंटो तक संडास में बैठा रह जाता है। और वह हमेशा इसके इलाज के लिए भटकता रहता है। योग में बहुत बड़ी शक्ति होती है जो कई तरह से आपके स्वास्थ्य को स्वस्थ रख सकता है। ठीक इसी तरह से योग की मदद से हम अपने कब्ज की समस्या को आसानी से दूर कर सकते हैं। हम यहाँ पर आपको Kabj ke liye yoga के बारे में पूरी जानकारी देंगे और अप इन आठ योगासनों को सुबह उठने के बाद करेंगे तो आपके कब्ज की समस्या दूर होगी।

कब्ज की समस्या दूर करने के लिए योग- kabj door karne ka yoga

कब्ज से परेशान व्यक्ति नीचे बताए गए आसनों को प्रयोग में लाएं। इससे उन्हें विशेष लाभ मिलेगा-

नौका संचालन

विधि:

  • पैरों को सामने की ओर फैला कर बैठ जाइए।
  • पैरों को एक साथ रखते हुए नाव चलाने के अंदाज में शरीर को संचालित कीजिए।
  • जितना संभव हो सके उतना आगे पीछे झुकते हुए एक घेरे का आकार बनाते जाइए।
  • ऐसा 10 बार कीजिए।
  • आप अपने ना चलाने के ढंग को उलट दीजिए। जैसे कि, अब आप विपरीत दिशा में जा रहे हैं। इसे भी 10 बार कीजिए।

लाभ

इससे पेट के समस्त अंगों एवं मांसपेशियों की मालिश हो जाती है। तथा पेट के अंदर जमी हुई वायु बाहर निकल जाती है। प्रथम 3 महीने तक गर्भवती स्त्रियों के लिए यह अभ्यास उत्तम माना जाता है। यह आमाशय को क्रियाशील बनाने वाला आसन भी कहा जाता है।यह सब कर यह कब्ज दूर करता है।

चक्की चलाना

विधि:

  • पैरों को फैला कर बैठ जाइए। हाथों को सामने सीधे फैलाकर अंगुलियों को एक दूसरे में फंसा लीजिए
  • कमर से झुकते हुए हाथों द्वारा घेरे का आकार बनाते जाइए
  • कल्पना कीजिए कि आप चक्की चला रहे हैं। इसे 10-10 बार दाएं और बाएं ओर से कीजिए।

लाभ

गर्भवती महिलाओं के लिए यह एक उपयोगी अभ्यास है क्योंकि, इससे गर्भाशय और आमाशय की मांसपेशियों की अच्छी मालिश हो जाती है तथा यह कब्ज से भी राहत दिलाता है।

रस्सी खींचना

विधि:

पैर सामने फैला कर बैठ जाइए और हाथों को बारी-बारी से ऊपर उठाइए और नीचे लाइए। मानो आप ऊपर से लटकी हुई रस्सी नीचे की ओर खींच रहे हैं।

लाभ

भुजाओं और कंधे की मांसपेशियों को शक्तिशाली और शिथिल बनाने में यह अभ्यास बड़ा सहायक है। इस आसन को करने से शरीर के अंदर जमे हुए जीवाणु तथा रोगाणु पसीने के माध्यम से बाहर निकलते हैं और कब्ज भी सताना दूर कर देती है।

लकड़ी काटना

विधि:

  • पैरों के पंजों के बल बैठ जाइए। घुटने झुके हुए हों और दूर-दूर रहे। भुजाओं को घुटने के बीच से सीधे सामने की ओर फैलाकर हाथों की अंगुलियों को एक दूसरे में फसा लें।
  • अब इस अंदाज में हाथ ऊपर नीचे करें मानो आप कुल्हाड़ी से लकड़ी काट रहे हो।
  • हाथों को ऊपर उठाते समय सांस लीजिए और हाथों को नीचे लाते समय सांस छोड़िए।
  • इसे 10 से 20 बार तक लगातार दोहराइए।

लाभ

अगर गर्भवती महिलाओं को पेट से संबंधित कोई भी शिकायत है तो इस आसन को उन्हें जरूर अभ्यास में लाना चाहिए। शिशु जन्म से पूर्व गर्भाशय आदि  की मांसपेशियों के व्यायाम के लिए यह बहुत उपयोगी है। इसका कब्ज को दूर करने में बहुत बड़ा महत्त्व है।

नमस्कार

विधि:

  • घुटने दूर दूर रखते हुए जमीन पर मुर्गे की तरह बैठ जाएं।
  • हाथों को प्रार्थना की मुद्रा में जोड़कर केहुनीयों से घुटनों को अंदर की तरफ से दबाइए।
  • सांस अंदर लीजिए सिर को उठाइए और जितना संभव हो उतना घुटनों को बाहर की ओर दबाइए।
  • कुछ क्षणों तक ऐसी स्थिति में रुकिए।
  • सांस बाहर निकालिए भुजाओं को सामने की ओर सीधा कीजिए और आगे व नीचे की ओर झुकते हुए घुटनों को पास-पास लगाइए।
  • सिर को घुटनों के निकट ले आइए।
  • घुटनों से हाथों को अंदर की ओर दबाइए फिर प्रारंभिक स्थिति में वापस आ जाइए।
  • इस अभ्यास को 10 बार दोहराइए

लाभ

जांघो, घुटनों, कंधो व भुजाओं पर इस अभ्यास का बड़ा लाभकारी और तेज असर पड़ता है। इससे आमाशय में दबाव पड़ता है जिससे पेट साफ रहता है उर कब्ज दूर होता है।

वायु निष्कासन

विधि:

  • पंजों के बल मुर्गे की तरह बैठ जाएं।
  • हाथों की उंगलियों को अंदर की तरफ से तलवों के नीचे रखें।
  • घुटनों के अंदर की तरफ केहुनियों का दबाव रखें।
  • सांस लीजिए और सिर को ऊपर उठाइए।
  • सांस छोड़िए सिर को नीचे लाते हुए व पैरों को सीधा करते हुए शरीर को उठाइए।
  • कुछ क्षणों तक ऐसी स्थिति में रुकिए और बाद में प्रारंभिक स्थिति में लौट जाइए 10 बार तक करिए

लाभ

इस अभ्यास के नाम से ही पता चलता है कि यह शरीर में जमी हुई गंदी वायु को बाहर निकालने का काम करता है। इसके अलावा भी इस आसन को करने से जांघ, घुटने और कंधों पर बड़ा लाभकारी प्रभाव पड़ता है और यह कब्ज की समस्या को कम करता है।

उदराकर्षणासन

विधि:

  • हाथों को घुटनों पर रखते हुए पंजों के बल मुर्गे की तरह  बैठ जाएं। जितना संभव हो सके, धड़ को दाहिनी और मोड़ते हुए शरीर के पीछे की तरफ देखिए। साथ ही साथ बाएं घुटने को जमीन पर झुकाये।
  • हथेलिया घुटनों पर रहे।
  • अब प्रारंभिक स्थिति में लौट आइए।
  • इसी प्रकार शरीर को विपरीत दिशा में मोड़कर कीजिए।
  • प्रत्येक दशा में शरीर को 10 बार मोड़िये

लाभ

  • आमाशय की बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यह बहुत उपयोगी आसन है क्योंकि, यह पाचन अंगों एवं मांसपेशियों को संकुचित करता और फैलाता है।
  • यह पेट और आँतों को साफ़ करने वाली क्रिया में किये जाने वाले आसनों में से एक है।
  • कब्ज़ से पीड़ित लोगों को यह आसन नियमित रूप से करना चाहिए।

सुप्त वज्रासन

विधि:

  • वज्रासन में बैठ जाइए।
  • भुजाओं और कुहनियों के सहारे पीछे की तरफ झुकतेजाइए जब तक की सिर जमीन से न लग जाये।
  • इसका ध्यान रहे की घुटने जमीन पर सटे हुए हों।
  • हांथों को जांघो पर रख लीजिये।
  • आँखें बंद करके पूरे शरीर को ढीला छोंड दीजिये।

श्वास कैसे रखें

  • सामान्य।
  • पेट के रोगों को दूर करने के लिए आमाशय को फैलाते व संकुचित करते हुए श्वास धीमी और गहरी होनी चाहिए।

लाभ

आमाशय के रोगों जैसे कब्ज के लिए यह आसन बहुत अच्छा है क्यंकि, यह आँतों को शक्ति के साथ फैलाता व संकुचित करता है।पूरे शरीर को मस्तिष्क से जोड़ने वाले रीढ़ के मुख्य स्नायुओं में दबाव सामन्य रखने के लिए यह आसन बड़ा लाभकारी है।

सावधानी

  • घुटनों को हठपूर्वक जमीन स्पर्श करने के लिए जाँघों और घुटनों की मासपेशियों व संधि-बन्धनों में अनावश्यक रूप से तनाव न उत्पन्न किया जाये। अपने शरीर की क्षमता एवं संभावनाओ को देखते हुए अंतिम स्थिति पर धीरे-धीरे पंहुचना चाहिए।
  • रीढ़ के निचले भाग के रोग जैसे, हड्डी की टी.बी. से पीड़ित रोगियों को किसी योग शिक्षक अथवा डॉक्टर से पूंछे बिना इस आसन का अभ्यास नही करना चाहिए।
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Sarthak Upadhyay is a health blogger and creative writer, who loves to explore various facts, ideas, and aspects of life and pen them down. The whole site is managed by him. Writing is his passion and enjoys writing on a vast variety of subjects. Periods, pregnancy, and Home-remedies are his specialty areas.

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