लकवा का इलाज , lakwa se peedit insaan, paralyzed person on wheelchair lakwa

मात्र 2 हफ्ते में पैरालिसिस (लकवा) का इलाज, लक्षण, प्रकार और कारण

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लकवा रोग जिसे अंग्रेजी के शब्दों में पैरालिसिस कहते है। यह रोग के होने पर स्वस्थ दिख रहा व्यक्ति  विकलांग हो जाता है। जब कभी किसी स्वस्थ दिख रहे व्यक्ति के किसी हिस्से में हलचल नही होती है मतलब अचानक से किसी अंग का काम न करना तो ऐसे परेशानी वाले व्यक्ति को लकवा रोगी (पैरालिसिस पेसेंट) कहते है। लकवा का इलाज के लिए हमें कुछ सावधानियाँ भी बरतनी चाहिए, चलिए इसके बारे में हम विस्तार से बात करते हैं।

लकवा रोग कैसे होता है

 जब कभी किसी कारणवश हमारे शरीर के मस्तिष्क के किसी भाग में खून नही पहुँच पाता है या मस्तिष्क में कोई खून प्रवाहित नली फट जाती है तो मस्तिष्क में खून की पूरी आपूर्ति नही हो पाती और मस्तिष्क का किसी अंग से संचार टूट जाता है और अंग को मस्तिष्क से दिशानिर्देश नही मिल पाता ऐसे में अंग अपना कार्य करना बंद कर देता है। इस परेशानी से प्रभावित या ग्रषित व्यक्ति को लकवा(पैरालिसिस) रोगी कहते है।

लकवा रोग का कारण –

  • ब्रेन ट्यूमर जो लकवा रोग का एक मुख्य कारण है क्योकि  ब्रेन ट्यूमर होने पर मस्तिष्क में रक्त प्रवाह सुचारू रूप से नही हो पाता।
  • अचानक सिर में चोट लगने पर। जब कभी मस्तिष्क में अचानक चोट लगता है तो की रक्तवाहिनी कुछ समय के लिए सिकुड़ जाती है या फट जाती है। सिकुड़े हुए रक्तवाहिनी जब वापस फैल नही पाती तो यह रोग हो जाता है।
  • शरीर के धमनियों में खराबी ।इस कारण की वजह से यह रोग ज्यादा होता है।
  • खून की कमी भी लकवा रोग का कारण होता है क्योकि जब खून की कमी शरीर में होती है तो खून सभी भागो में सामान रूप से नही पहुँच पता है।
  • मेरुदंड के जकड़न के कारण मेरुदंड के मांसपेशियों में गति नही होती है जिससे लकवा रोग हो सकता है।
  • विषैला तत्व जो शरीर में पहुँच कर हमारे रक्त वाहिनियों को नष्ट करने के काम करते है। इनके शरीर में पहुँच जाने पर  भी लकवा रोग होता है।

लकवा रोग के लक्षण

  • ठीक तरीके से आवाज न निकलना अर्थात बोलने में भारी तकलीफ।
  • आँखो से बहुत कम दिखाना या ज्यादा धुंधला दिखाई देना।
  • किसी अंग में काफी समय से झुनझुनी का लगातार बने ही रहना।
  • मांशपेशियों में खिंचाव का काफी समय से होना या सख्त होना।
  • सोचने व समझने की शक्ति में कमी।
  • शरीर के किसी भाग या अंग पर नियंत्रण का खो देना।

लकवा रोग के प्रकार

इसके प्रकार अनेक है परन्तु हम कुछ बिशेष प्रकार के बारे में जानेंगे ।

निम्नांग लकवा

इस प्रकार के लकवा रोगी के शरीर के निचला भाग अर्थात कमर के नीचे का हिस्सा काम करना बंद कर देता है। जैसे – पैरो का सुन पड़ जाना।

अर्धांग लकवा

इस प्रकार में रोगी के शरीर का बायाँ या दाया हिस्सा काम करना बंद कर देता है।

एकांग लकवा

इस प्रकार के लकवा के अंतर्गत शरीर के किसी खास अंग का पूरी तरह से काम करना बंद हो जाता है जैसे -हाथ या पैर का।

मुखमंडल लकवा

इस तरह के लकवा ने मुँह का टेढ़ापन हो जाना देखा जाता है।

जीभ लकवा

इस प्रकार में रोगी शब्दों का सही उच्चारण नही कर पाता है क्योकि जीभ सही कार्य नही कर पाता है।

लकवा का इलाज, उपचार और उपाय

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  1. लकवा रोगी को प्रभावित अंग पर भाप स्नान करना चाहिए जिससे कि सिकुड़न के कारण सुन पड़ी नसे फ़ैल सके या रुका रक्त प्रवाह फिर से गंतव्य हो जाये।
  2. व्यायाम उपाय ।यह लकवा व्यक्ति के लिए सबसे अच्छी उपाय है रोजाना सुबह लकवा प्रभावित व्यक्ति को व्यायाम करना चाहिए। सुन पड़े अंग को ज्यादा हिलाने डुलाने का प्रयास करते रहना चाहिए।
  3. विटामिन्स व मिनरल्स से भरपूर फलो का सेवन करना चाहिए।
  4. खून बढ़ने वाले फलो व सब्जियों का ज्यादा सेवन करे। जैसे चुकंदर खाएं या इसका रस शरीर में रक्त की पूर्ति करते है।
  5. रोजाना सुबह सूर्य की रोशनी लगभग 20 से 25 मिनट लेनी चाहिए।
  6. तनाव मुक्त रहना चाहिए। कोशिस करे की मस्तिस्क पर ज्यादा भार न पड़े।
  7. तेल को हल्का गर्म करके प्रभावित अंग की दिन में दो बार मालिश करनी चाहिए।
  8. सोते समय उचे तकिये का इस्तेमाल ना करे क्योकि ज्यादा उचे तकिये लगाने से ब्लड मस्तिष्क में पूर्ण रूप से नही पहुँच पता।
  9. रोगी को हँसते रहना चाहिए या हसाना चाहिए क्योकि हंसने पर शरीर की सारी मांसपेशिया पूर्ण रूप से स्वतंत्र होती है। दबी हुयी नस फिर से ठीक हो सकती है।
  10. लहसुन के चार पांच दाने खाएं और दूध पिए इससे भी लकवा रोग में फायदा होता है।
  11. लकवा का इलाज करने के लिए आप अनुलोम विलोम प्राणायाम का सहारा ले सकते हैं। इस प्राणायाम को आप रोज्ज सुबह आधे घंटे के लिए करें।
  12. कालवा रोगियों को विटामिन डी से भरे हुए आहार का एवं करना चाहिए, और उसके लिए सूर्य स्नान एक बहुत ही बढ़िया विकल्प हो सकता है।

सरसों का तेल

लकवा की समस्या ठीक करने में सरसों के तेल का इस्तेमाल बेझिझक किया जा सकता है। लकवा से प्रभावित सतह पर आप सरसों के तेल को लगाएं और मालिश करें। तेल हल्का गर्म हो तो अच्छा है। आप सरसों के तेल की जगह घी का भी प्रयोग कर सकते हैं। रीवा जिले में रहने वाले आरिफ को एक सामान्य लकवा था और डॉक्टर ने यह करने की सलाह दी और अब वह आसानी से चल फिर रहा है और काफी खुश भी है। २ महीने में ही उसका लकवा दूर हो गया था।

योग का ले सहारा

अनुलोम विलोम आसन के लकवा ठीक करने में एक बहुत सकारात्मक परिणाम देता हैं। आधे घंटे तक लगातार अनुलोम विलोम करने से आपको इसके तुरंत के भी परिणाम नजर आ जाएँगे। यह लकवा को दूर करने का सबसे अच्छा और आसान उपाय है। इसमें 2 सप्ताह के भीतर लकवा का इलाज करने की क्षमता है। कपालभाती, उज्जाई प्राणायाम भी लकवा दूर करने के लिए बहुत प्रभावी हैं।

एक्युप्रेशर है कमाल का

पैरालिसिस में राहत पाने के लिए रिंग फिंगर के ऊपरी हिस्से को दबाएं। यदि एक्युप्रेशर बाईं ओर है तो आप बाएँ हिस्से की रिंग फिंगर दबाएँ, यदि दाएं तरफ है तो दाएं तरफ की फिंगर दबाने से आपको आराम मिलेगा।

लहसुन

लकवा को ठीक करने के लिए लहसुन भी एक और प्रभावी घरेलू उपाय है। लहसुन के 5 से 6 टुकड़े लें और उन्हें पीस लें। अब इसमें दो चम्मच शहद मिलाएं। अब इस मिश्रण को रोजाना लें और दो महीने के भीतर आप लकवा से राहत पा सकते हैं। इसके अलावा दूध में लहसुन के 5-6 टुकड़े उबालें और उन्हें रोजाना लें। यह आपके रक्तचाप को नियंत्रित करेगा और साथ ही प्रभावित भाग सही हो जाएगा।

कलौंजी का तेल (निगेला सतिवा ऑयल)

इस विधि में कलौंजी के तेल को गुनगुना करके शरीर के प्रभावित हिस्से पर धीरे-धीरे 20 मिनट तक मालिश करें। इसके अलावा रोजाना दो से तीन चम्मच कलौंजी का तेल अपने आहार में शामिल करें। 30-45 दिनों के भीतर आप अपने शरीर के हिस्से में सकारात्मक बदलाव देखेंगे।

काली मिर्च

50 से 60 ग्राम काली मिर्च लें और इसे एक पाव सरसों के तेल में पकाएं। अब इस पके हुए तेल को गुनगुना करें और इसे शरीर के प्रभावित जगह पर धीरे-धीरे लगाएं। इससे आपको कम समय में ही लकवा से राहत मिलेगी

अदरक

उरद के 10 ग्राम दाल के साथ 5 ग्राम अदरक पीस लें। अब इसे 50 ग्राम सरसों के तेल में 8 मिनट तक पकाएं। इसमें 2 ग्राम कपूए पाउडर मिलाएं और इसे प्रभावित क्षेत्र पर धीरे-धीरे मालिश करें। इस तरह से तैयार तेल आर्थराइटिस की समस्या में भी फायदेमंद है

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