एंटीबायोटिक दवाओं

एंटीबायोटिक दवाओं के नुकसान – side-effects of using anti-biotic

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एंटीबायोटिक्स दुनिया में सभी जगह उपयोग में लाई जाती हैं एंटीबायोटिक्स का मुख्य उपयोग संक्रामक बीमारियों को रोकने या समाप्त करने के लिए किया जाता है| पहली एंटीबायोटिक पेनिसिलिन की खोज 1928 में हुई थी तब से अब तक लगभग 50 से ज्यादा एंटीबायोटिक की खोज की जा चुकी है| एंटीबायोटिक दवाओं के बाजार में कई ब्रांड नेम के साथ व्यापार हो रहे हैं| एंटीबायोटिक संक्रामक बीमारियों यानी वायरस बैक्टीरिया आज से फैलने वाली बीमारियों से बचाते हैं लेकिन इनका अनियंत्रित इस्तेमाल करने पर शरीर में इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता पैदा हो जाती है जिससे यह दवाई कार्य करना बंद कर देती हैं| तो चलिए इन दवाओं के बारे में कुछ विशेष चर्चा करते हैं|

क्या है एंटीबायोटिक दवा?

एंटीबायोटिक दवाई वह रासायनिक मिश्रण है, जो बैक्टीरिया वायरस आदि को शरीर पर आक्रमण करने  से रोकते हैं| लेकिन अलग-अलग एंटीबायोटिक्स का 5 से 10 या 15 से 12 दिन का कोर्स होता है जिसे पूरा करना जरूरी होता है|

एंटीबायोटिक दवाओं के नुकसान- antibiotic dawai ke nuksan

पाचन तंत्र समस्याएं
यूके के नेशनल हेल्थ सर्विस  के मुताबिक, एंटीबायोटिक्स लेने वाले 10 में से 1 लोग पाचन तंत्र के समस्याओं का अनुभव करते हैं। इनमें मतली, उल्टी, दस्त, अपचन, और सूजन आदि समस्याएँ होती  हैं|  आपके पेट में दर्द का  भी हो सकता है। आम तौर पर इस तरह के साइड इफेक्ट हल्के होते हैं और दवा के पूरा हो जाने के बाद ठीक हो जाते हैं| यदि आपको ये समस्याएँ गंभीर होती हैं  या एंटीबायोटिक्स के कोर्स  को पूरा करने के बाद भी समस्याएं बनी रहती हैं, तो आपको जितनी जल्दी हो सके अपने डॉक्टर तक पहुँचे।

प्रतिरक्षा प्रणाली  पर दुष्प्रभाव 

अगर आप एंटी-बायोटिक दवाइयों का ज्यादा या गलत ढंग से इस्तेमाल करते हैं तो इससे आपकी इम्युनिटी कमजोर पड़ जाती है और आप अक्सर बीमार हो जाते है|

मेटाबोलिज्म से रिलेटेड समस्याओं का जन्म हो जाता है

शोध में पाया गया है कि  एंटीबायोटिक्स के संपर्क में आते ही मेटाबोलिज्म पर भारी असर पड़ता है|  अगर आपका मेटाबोलिज्म बिगड़ जाता है तो आप  मोटापे, मधुमेह, और चयापचय सिंड्रोम के शिकार पड़ स्कते हैं।

टाइप 1 मधुमेह का जोखिम

शोधकर्ताओं का मानना है कि एंटीबायोटिक उपयोग और इस बीमारी के बीच एक कनेक्शन हो सकता है| बुखार ठीक करने, और भी रोगों के इलाज के लिए हर वक्त एंटीबायोटिक को इस्तेमाल करना आपको टाइप 1 मधुमेह के खतरे में दाल सकता है|

मुंह के अल्सर, और छाले
इसके गलत सेवन के  कारण आप मुंह के घाव भी विकसित कर सकते हैं| मुंह के अल्सर या छाले भी एंटीबायोटिक्स का उपयोग करने के परिणामस्वरूप हो सकते हैं| कुछ दवाएं जैसे एमोक्सिसिलिन अक्सर इस दुष्प्रभाव  का कारण बन जाते हैं|

एलर्जी: त्वचा में चकत्ते, खांसी, घरघराहट, और सांस लेने में कठिनाई
एंटीबायोटिक दवाओं के चलते याएं 15 लोगो  में से लगभग 1 लोग को होती हैं। सेफलोस्पोरिन और पेनिसिलिन जैसे कुछ एंटीबायोटिक्स अधिक अपराधी हैं। यदि आपके पास एलर्जी प्रतिक्रिया है, तो आपको  काफी खुजली हो सकती है। एलर्जी के अन्य लक्षण खांसी हैं। कुछ लोग अपने गले में खसखसाहट महसूस कर सकते हैं जो सांस लेने में दिक्कत पैदा  कर सकता है|  यदि यह गंभीर हो जाता है, तो आपको अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा देखभाल के लिए  जाना चाहिए।

 दवाई काम करना बंद कर देती हैं

यदि एंटीबायोटिक्स को बीच में छोड़ दिया जाए या बिना वजह लिया जाए ,जरूरत से ज्यादा लिया जाए तो इन दवाओं की प्रतिक्रीया से आदमी में दवाईयों के प्रति रोग  प्रतिरोधक क्षमता पैदा हो जाती है जिससे दवाई शरीर ,में कार्य करना बंद कर देती हैं|

एंटीबायोटिक्स के लिए डब्ल्यूएचओ का प्रोटोकाल-

डब्ल्यूएचओ जैसी कई एजेंसियों ने एंटीबायोटिक दवा के इस्तेमाल के लिए प्रोटोकॉल तैयार किए हैं| जिनके अनुसार शरीर में बैक्टीरिया संक्रमण की पुष्टि होने के बाद भीही डॉक्टर के द्वारा  ही एंटीबायोटिक लिया जाना चाहिए|

इन्टरनेट से देखकर न लें एंटीबायोटिक

बिना जांच के एंटीबॉयोटिक दवाई लेने से उसके गंभीर प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ता है| इंटरनेट से देखकर या पर्चे पर्चे में लिखे एंटीबायोटिक्स ले लेने पर कभी कभी बहुत ही बेकार परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं| इसलिए आप अपने डॉक्टर से सम्पर्क करने के बाद ही इसका इस्तेमाल करें|

भारतीय डॉक्टर क्या कहते हैं एंटीबायोटिक्स के बारे में

एंटीबायोटिक के बारे में  भारतीय डॉक्टरों का कहना है कि भारत जैसे विकासशील देश में जांच की सुविधाएं पर्याप्त ना होने के कारण इसके इस्तेमाल के लिए डब्ल्यूएचओ यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन को हस्तक्षेप करना पड़ा है| भारतीय डॉक्टरों का कहना है कि भारत जैसे विकासशील देश में सुविधाओं विशेष का जांच सुविधाओं के अभाव होने के कारण डॉक्टर अपने अनुभव से ही  संक्रमण की पुष्टि कर लेते हैं और एंटीबायोटिक लिख देते हैं और लोगों पर इसका साइड इफ़ेक्ट हो जाता है|

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