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thalassemia ka ilaj, lakshan,karan treatment in hindi – थैलेसीमिया का इलाज

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थैलेसीमिया एक ऐसा विकार है जिसमें, बच्चों के रक्त से लाल कण और शरीर में हीमोग्लोबिन कम हो जाता है| ऐसे में इन बच्चों को रक्त प्रतिदिन 4 सप्ताह में चढ़ाने की आवश्यकता होती है और ऐसा न करने पर इनकी मृत्यु निश्चित हो जाती है| रोगी को पल-पल बीमारी से जूझते हुए देखने का दर्द और पीड़ा और अच्छे से अच्छे उपचार देने के बावजूद उसे मृत्यु तक पहुंचने में केवल कुछ वर्षों तक के लिए बचाया जा सकता है| thalassemia ka ilaj treatment in hindi – थैलेसीमिया का इलाज

थैलेसीमिया क्या है?

थैलेसीमिया मानव जीवन में पाए जाने वाला एक ऐसा विकार है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने आने वाली नस्लों में पलता है और कुछ विशेष परिस्थितियों में अपना घातक व विकराल रूप दिखा देता है| थैलेसीमिया एक ऐसा विकार है जो वंशानुगत कारणों से कई शताब्दियों से मानव जीवन में निवास करता आ रहा है| कुछ लोगों में किन्ही कारणों से रक्त की कमी हो जाती है जिससे व्यक्ति को दैनिक क्रियाकलापों में कुछ कठिनाइयां आ सकती हैं| साधारण तथा खाने पीने की चीजें व गेहूं के ज्वारों का रस पीने तथा प्राकृतिक चिकित्सा के कुछ प्रयोग से थैलेसीमिया पर काबू पाया जा सकता है| थैलेसीमिया दो प्रकार की होती हैं एक थैलेसीमिया ट्रेट जिसे थैलेसीमिया माइनर भी कहा जाता है तथा थैलेसीमिया मेजर| थैलेसीमिया माइनर वाले व्यक्ति को लगभग स्वस्थ भी कहा जा सकता है| thalassemia ka ilaj वह मात्र थैलेसीमिया विकार के कैरियर होते हैं पर थैलेसीमिया मेजर गंभीर किस्म का एनीमिया है| प्राकृतिक रूप से लाल कण ना बन पाने के कारण रोगी को रक्त चढ़ाना पड़ता है| आज भी मेडिकल विज्ञान के पास थैलीसीमिया के लिए कोई विश्वसनीय और कारगर दवा नहीं है| इस रुप में खून चढ़ाने के अलावा दूसरे तरीके से इलाज किया जाता है वह है, अस्थि मज्जा का प्रत्यारोपण| यह दोनों उपाय खर्चीले और तकलीफ देने वाले हैं|

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 थैलेसीमिया के लक्षण

जन्म के पश्चात बालक को प्रथम वर्ष में पाण्डुता आने लगे, उसका विकास ना हो, मुख् एवं मस्तिष्क का भार बेडोल होने लगे, यकृत एवं प्लीहा में वृद्धि व शोध होने लगे तब बालक को थैलेसीमिया की व्याधि किसी न किसी प्रकार से होने की संभावना रहती है| इस रोग की वजह से बच्चे का लीवर नया रक्त नहीं बना पाता| इस कारण में खून की कमी होती रहती है| धीरे-धीरे रक्त में हीमोग्लोबिन का प्रतिशत कम होकर 13-14 से 4-6 ग्राम तक उतर जाता है| इस रोग की पहचान हीमोग्लोबिन के प्रतिशत की जांच के बाद ही होती है| शुरू में बच्चा तंदुरुस्त दिखाई देता है पर उम्र बढ़ते ही रक्त की कमी के कारण थैलेसीमिया की गिरफ्त में आ जाता है| एक-दो माह बाद बच्चा चिड़चिड़ा व कमजोर हो जाता है| उसके दिल की धड़कन बढ़ जाती है| उसके तन मन दोनों एक साथ कमजोर हो जाते हैं| ‘thalassemia ka ilaj treatment in hindi – थैलेसीमिया का इलाज’ शरीर सूखने लगता है| दिल की धड़कन बढ़ जाती है| खेलने कूदने से घबराता है| बच्चे को आराम अच्छा लगता है| मुंह में बार-बार लार आ जाती है और टपकती रहती है| शरीर मुरझाया रहता है| आंखों व गालों में सूजन दिखाई देने लगती हैं| खाना हजम नहीं होता है|

थैलेसीमिया का उपचार

थैलेसीमिया मेजर वाले बच्चे को नियमित रूप से रक्त चढ़ाया जाता है| रोगी को रक्त चढ़ाने का मुख्य उद्देश होता है शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा ठीक 10 ग्राम तक बनी रहे| लेकिन बार-बार रक्त चढ़ाने पर शरीर में अनावश्यक लौह तत्व जमा होने लगते हैं तथा उससे हृदय लिवर और गुर्दों पर प्रभाव पड़ता है| अनावश्यक तत्वों को निकालने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा ही खास तौर से कारगर है जिसमें रोगी के लीवर को सक्रिय या उत्तेजित करने वाले उपचार बताए गए हैं| thalassemia ka ilaj

  1. मनुष्य की बड़ी आंत में आवश्यकता से अधिक देर तक माल पड़ा रहता है| शरीर का शोषण करता रहता है और रक्त वाहिनियों में पहुंचकर धमनियों को सख्त बना देता है| जिससे शरीर में लचीलापन कम हो जाता है| इसलिए चिकित्सा के प्रारंभ में पेट साफ रखना चाहिए| गुदामार्ग से पानी या कोई तरल पदार्थ आदि को चढ़ाने की विधि को डूस या वास्ति कर्म कहते हैं| गेहूं, घास के पत्तों के रस का जूस लेने से क्लोरोफिल सीधे रक्त प्रवाह में मिल जाता है| जो रस से मुंह से लिया जाता है उसे थोड़ा बहुत पाचन प्रणाली की वजह से अंतर आ जाता है परंतु डूस द्वारा लिए गए रस में कोई रद्दोबदल नहीं होता| वह ज्यों का त्यों शरीर में पहुंचकर काम करता है| डूस में स्वाद और गंध का भी सवाल नहीं उठता| thalassemia treatment in hindi
  2. धूप स्नान से शरीर के रक्त में हीमोग्लोबिन तत्व की मात्रा 2% बढ़ जाती है| इसके लिए आपको लौह प्रधान या अन्य प्रकार के भोजन की आवश्यकता नहीं है| थैलेसीमिया रोग में रक्त में लाल कण बढ़ाने में धूप स्नान बहुत उपयोगी है| इस स्नान को बड़ी आसानी से घर पर किया जा सकता है| सिर पर गीला कपड़ा रखकर शरीर के पूरे कपड़े उतारकर सिर्फ लंगोटी या अंडरवियर पहनकर रोगी को जो रंग पसंद हो उसे उसे रंग का प्लास्टिक पॉलिथीन की शीत ओढ़कर शरीर को बाहर करके लकड़ी के तख्ते पर लेट जाना चाहिए|
  3. सही चिकित्सा यही है कि लीवर व अन्य अंगों द्वारा शरीर में नया खून बने और दूषित खून की शुद्धि अच्छी तरह से हो जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन की जरूरी मात्रा बनी रहे| “thalassemia ka ilaj treatment in hindi – थैलेसीमिया का इलाज”

थैलेसीमिया के रोगी को निम्न बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए

  1. सुबह उठते ही एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस तथा दो चम्मच शहद और एक अदरक का रस मिलाकर सेवन करना चाहिए|
  2. सुबह-सुबह सौ ग्राम गेहूं के पत्तों का रस पीना चाहिए|
  3. सुबह 9:00 बजे नाश्ते में अंगूर, सेब, संतरा, चीकू, पपीता आदि फलों में किसी एक  फल का प्रयोग करना चाहिए|
  4. दोपहर में चोकर समेत आटे की रोटी, सलाद, लहसुन, अदरक, आंवला, पुदीना  की चटनी का प्रयोग करना चाहिए|
  5. शाम के समय गेहूं के पत्तों का रस सौ ग्राम प्रयोग में लाना चाहिए|
  6. रात्रि भोजन में केवल गाय का दूध शहद मिलाकर पीना चाहिए| thalassemia ka ilaj
  7. रात को सोते समय तीन चार सूखे अंजीर, मुनक्का अच्छी तरह धोकर, सुबह शीशे के  बर्तन में रखे, रात्रि उसी पानी में मसल लें, गर्म कर पानी को छानकर नींबू निचोड़कर पिए|

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